बदलते मौसम से आलू की फ़सल में झुलसा रोग की बढ़ी संभावना, सायमोक्सनिल व मैंकोजेब का करें छिड़काव : डॉ अजय
कानपुर, 05 फरवरी (हि. स.)। मौसम को देखते हुए आलू में झुलसा रोग आने की संभावना दिख रही है। किसान भाइयों को पछेती झुलसा रोग से बचाव करना चाहिए। यह बातें गुरूवार को उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद में कम्पनी बाग़ स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के साकभाजी विज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ केशव आर्य ने कही।
आलू विशेषज्ञ डॉक्टर अजय यादव ने बताया कि केंद्रीय एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों की आलू एक मुख्य फसल है। जिसका समय रहते हुए देखभाल न किया जाए तो नुकसान हो सकता है। खड़ी फसल में झुलसा रोग महत्वपूर्ण होता है जिसके लिए किसान को पहले से ही प्रबंधन करना चाहिए।
डॉ यादव ने कहा कि सायमोक्सनिल+मैंकोजेब 2.5 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी के दर से अथवा एजोक्सीस्ट्रॉबिन+टीनूकोनाजोल एक ग्राम दवा प्रति लीटर पानी कि दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। जिसमें झुलसा रोग से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आलू की पत्तियों पर छोटी-छोटी बिंदी के रूप में बहुत सारे धब्बे दिखाई पड़ते हैं, जो अलटरनेरिया की वजह से आता है। यह बिंदिया पोषक तत्व की कमी को जैसे भी दिखाई देते हैं। जिसको मैनी लीफ कॉम्प्लेक्स डिजीज कहते हैं l
उन्होंने बताया कि इसका उपाय क्लोरोथेलोनील नाम की दवा ढाई ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाएं जिसमें मल्टी माइक्रोन्यूट्रिएंट नाम से पैकेट बाजार में उपलब्ध होते हैं जिसमें (आयरन, कॉपर, जिंक, कैल्शियम, मलिबडनम, बोरान, क्लोरीन ) आदि तत्व होते हैं। जो एक किलोग्राम प्रति एकड़ के लिए पर्याप्त होता है यदि एक एकड़ में 15 लीटर की एक टंकी है। आठ से 10 टंकी में पूर्ण हो जाता है। 100 ग्राम से लेकर के 120 ग्राम एक टंकी में डालना चाहिए जिससे काफी हद तक उसे रोग का कंट्रोल कर लेते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / मो0 महमूद