विख्यात ड्रमर पद्मश्री शिवमणि ने गंगा आरती में मां गंगा के समक्ष दी प्रस्तुति, झूमे श्रद्धालु
—सुर और ताल की साधना से भारतीय संगीत कला के प्रेमी आह्लादित,गूंजा हर—हर महादेव का उद्घोष
वाराणसी, 06 अप्रैल (हि.स.)। श्री संकटमोचन मंदिर के वार्षिक संगीत समारोह में भाग लेने आए देश के जाने—माने ड्रमर पद्मश्री शिवमणि ने सोमवार शाम को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के घाट (ललिताघाट )पर आयोजित मां गंगा की आरती में अपनी साधना और रियाज मां गंगा को समर्पित किया।
गंगा आरती के पूर्व मां गंगा की विधिवत पूजन कर पद्मश्री शिवमणि ने ड्रम का वादन प्रारंभ किया। गंगा आरती में मां गंगा के पारम्परिक भजनों पर उनकी जानदार प्रस्तुति से श्रद्धालु और संगीत प्रेमी आह्लादित दिखे। ड्रम पर उनके सुर और ताल ने वहाँ उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। वादन के साथ आरती का वातावरण और भी अधिक दिव्य तथा आलोकमय हो उठा। इस दौरान संपूर्ण आरती क्षेत्र “हर हर महादेव” के उद्घोष से गूँजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने इस अद्वितीय संगम—भक्ति और संगीत—का हृदय से अनुभव किया और इसकी सराहना की। गंगा आरती में ड्रमर पद्मश्री शिवमणि ने जमीन पर बैठ कर काशी की आध्यात्मिक परंपरा और भारतीय संगीत कला को ड्रमर पद्मश्री शिवमणि ने अपने साधना से नई उंचाई दी। उनकी दमदार प्रस्तुति देखने के लिए पहले से ही हजारों श्रद्धालु घाट पर डटे रहे।
बताते चले,ड्रमर पद्मश्री शिवमणि जब भी श्री संकट मोचन के आंगन में अपनी प्रस्तुति की हाजिरी लगाने आते है तो बाबा विश्वनाथ के दरबार में भी पहुंच कर मत्था टेकते है और बाबा को अपनी साधना समर्पित करते है। वे पाश्चात्य वाद्य यंत्र ड्रम को मुख्य आधार बनाकर अपने वादन में भारतीयता का समावेश करते हुए झाल, मंजीरा, तबला, पूजा की घण्टी, घुंघुरू, के साथ बाल्टी का सहज प्रयोग कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी