डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के डॉ. निखिल कुमार विश्व के शीर्ष 05 प्रतिशत स्वतंत्र शोधकर्ताओं में शामिल

 


गोरखपुर, 08 जून (हि.स.)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) के भौतिकी विभाग के युवा सहायक आचार्य एवं शोधकर्ता डॉ. निखिल कुमार को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मूल्यांकन मंच SciRank Global द्वारा वर्ष 2025 की वैश्विक शोध रैंकिंग में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत (Top 5%) स्वतंत्र शोधकर्ताओं (Independent Researchers) में स्थान प्रदान किया गया है।

SciRank Global द्वारा जारी प्रमाणपत्र के अनुसार यह चयन पूर्णतः वैश्विक स्तर पर किए गए वैज्ञानिक बिब्लियोमेट्रिक विश्लेषण—जिसमें शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता, उद्धरण, प्रभाव तथा समग्र वैज्ञानिक योगदान का मूल्यांकन शामिल है—के आधार पर किया गया है। यह उपलब्धि न केवल दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि समूचे पूर्वांचल के वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी अत्यंत गौरवपूर्ण मानी जा रही है।

डॉ. कुमार के शोध कार्य विश्व की कई प्रतिष्ठित और उच्च प्रभाव वाली वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। विशेष रूप से उनके शोध पत्र Physical Review Letters (APS) तथा Nature Scientific Reports जैसी अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं, जिन्हें वैज्ञानिक समुदाय में अत्यंत प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त है। इन्हीं उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रकाशनों ने उनकी वैश्विक पहचान और रैंकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डॉ. निखिल कुमार ने प्रारंभिक शिक्षा मेहदावल, संत कबीर नगर से प्राप्त की तथा इसके बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IIT Kanpur) और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा एवं शोध कार्य किया।

उनका प्रमुख शोध क्षेत्र सुपरकंडक्टिंग माइक्रो एवं नैनो SQUID (Superconducting Quantum Interference Device) तकनीक है, जिसे अत्यंत संवेदनशील चुंबकीय क्षेत्र मापन उपकरण माना जाता है। यह तकनीक नैनोस्तरीय चुंबकीय घटनाओं, क्वांटम तकनीक, स्पिन्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा निदान तथा उन्नत नैनो-इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अध्ययन में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। इस क्षेत्र में उनके शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय मान्यता प्राप्त हुई है।

डॉ. कुमार को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा प्रतिष्ठित DST इंस्पायर फैकल्टी फेलोशिप अवार्ड सहित कुल चार शोध अनुदानों के माध्यम से लगभग 82 लाख रुपये की शोध निधि प्राप्त हुई है।

वर्तमान में वे उच्च तापमान सुपरकंडक्टर्स (High-Tc Superconductors) तथा फेरोमैग्नेटिक थिन फिल्म हेटरोस्ट्रक्चर्स के मूलभूत भौतिक गुणों एवं उनके नैनो-इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में अनुप्रयोगों पर कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही वे फेराइट–पॉलिमर नैनोकॉम्पोजिट्स तथा उच्च दक्षता वाले परोव्स्काइट सोलर सेल्स के विकास एवं उनके भौतिक गुणों के अध्ययन में भी सक्रिय रूप से संलग्न हैं। उनका शोध कार्य बहुविषयक (Multidisciplinary) प्रकृति का है, जो ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत पदार्थ विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 में उनके सहयोग से Q1 श्रेणी की अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं—Materials Today Communications, Journal of Physics and Chemistry of Solids तथा Ceramics International—में तीन महत्वपूर्ण शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं। ये पत्रिकाएँ अपने उच्च प्रभाव कारक और कठोर पीयर-रिव्यू प्रक्रिया के लिए विश्व स्तर पर जानी जाती हैं।

विशेषज्ञों का मत है कि SciRank Global जैसी रैंकिंग प्रणाली केवल शोध पत्रों की संख्या पर आधारित नहीं होती, बल्कि शोध के प्रभाव, गुणवत्ता, उद्धरणों और वैश्विक योगदान को समग्र रूप से मूल्यांकित करती है। इस दृष्टि से यह उपलब्धि डॉ. निखिल कुमार के शोध कार्य की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता का सशक्त प्रमाण है।

कुलपति ने साेमवार काे बताया कि यह उपलब्धि डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध वातावरण को अंतरराष्ट्रीय पहचान प्रदान करती है और यह अपेक्षा की जाती है कि डॉ. कुमार भविष्य में भी सुपरकंडक्टिविटी, नैनो-विज्ञान तथा उन्नत कार्यात्मक पदार्थों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे, जिससे भारतीय विज्ञान को वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त होंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय