हम जन्माष्टमी तो मानते हैं, लेकिन कृष्ण की शिक्षाओं का पालन नहीं करते : सुधीर गुप्ता
मुरादाबाद, 13 सितम्बर (हि.स.)। अध्यात्म ज्ञान एवं चिन्तन संस्था की 193वीं मासिक ब्रह्मज्ञान विचार गोष्ठी का आयोजन रविवार शाम को एमआईटी सभागार में किया गया, जिसका विषय “श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व” रहा। इस विषय का प्रारम्भ करते हुए सुधीर गुप्ता ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं। उपवास रखकर भगवान की पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन करके प्रसाद ग्रहण करके इतिश्री कर देते हैं। लेकिन हम हम श्रीकृष्ण के जीवन की विलक्षण बातें, उनकी उपलब्धियां और उनके द्वारा दी गईं शिक्षाओं पर विचार नहीं करते हैं, इसलिए उन पर आचरण करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता है।
सुधीर गुप्ता ने आगे कहां की हम श्रीकृष्ण को माखन चोर और बांसुरी वादक के तौर पर ही याद करते हैं जबकि उनका जो वास्तविक स्वरुप है वह चक्रधारी, शक्तिवान और सम्पूर्ण रुप से कार्य कुशल एवं कर्मठ व्यक्ति का है। आज हमें आवश्यकता श्रीकृष्ण के उसी मूल स्वरुप की है। उसी का हमे अनुसरण करना है और उसी की तरह से अपने जीवन को शक्तिवान और कर्तव्यपरायण बनाना है।
मुख्य वक्ता डाॅ. रमेश चन्द्र यादव ‘कृष्ण’ ने बताया कि श्रीकृष्ण का जीवन अत्यन्त अद्भुत है। उनका जन्म घर में नहीं जेल में हुआ। उनकी माताएं दो, पिता दो, नगरियां दो तथा भक्त और असंख्य। वे ब्राह्मबल और क्षात्रबल के हिमालय हैं। जन्म से पूर्व ही उन्हे चुनौतियां मिलनी प्रारम्भ हो गई थी, जैसे पूतना, शकटासुर, तृणावर्त, वकासुर, कालिया आदि। वे इन सभी का संहार करते हुए आगे बढ़े और मल्लविद्या के साथ-साथ संगीत, नृत्य और वाद्य में भी पूर्ण श्रेष्ठता प्राप्त की। उनके समय में भारतवर्ष की स्थिति अत्यन्त संकटमयी थी। राष्ट्र में चारो ओर उच्छंखृल शासकों का आतंक था। उन्होंने उन सबको नियन्त्रित किया और निरंकुश शासकों का वध किया। उन्होंने नारीस्मिता की रक्षा की तथा नारी का अपमान करने वालों को दंड दिया। इसी के साथ उन्होंने ज्ञान, कर्म और भक्ति का समन्वय कर राष्ट्र को धर्म क्षेत्र बनाया।
विचार गोष्ठी में एसपी सिंह, दिनेश कुमार शर्मा, सूर्य प्रकाश द्विवेदी, अनिल कुमार सिंह, नीरज कुमार, सुशील कुमार यादव, अक्षेद्रनाथ सारस्वत, विजय कुमार खन्ना, अष्वनी दीक्षित, विनोद कुमार सिंह, अनिल सिक्का, सुभाष चन्द्र गुप्ता, शशि कुमार, धवल दीक्षित उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल