उर्सला अस्पताल में 22 डॉक्टर समेत 32 कर्मचारी अनुपस्थित मिले, डीएम ने दिए एक दिन का वेतन काटने का आदेश
कानपुर, 12 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में कानपुर नगर की स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने मंगलवार की सुबह जिला अस्पताल उर्सला का औचक निरीक्षण किया। उनके साथ अपर जिलाधिकारी डा. राजेश कुमार मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में तैनात करीब 22 डॉक्टर और 10 अन्य कर्मचारी समेत कुल 32 लोग उपस्थित थे। डीएम ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं। दो दलाल भी पकड़े गए।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह जब जिला पुरुष चिकित्सालय उर्सला पहुंचे तो मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बी.सी. पाल उस समय अस्पताल में मौजूद नहीं थे। डीएम के आने की जानकारी जब उन्हें मिली तो आनन-फानन में पहुंचे। डीएम ने सबसे पहले उपस्थिति पंजिका की जांच की, जिसमें डॉ. राज किशोर, डॉ. ए.के. कनौजिया, डॉ. आर.सी. यादव, डॉ. अरुण प्रकाश, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. आर.के. अग्रवाल, डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. विजय कुमार सिंह, डॉ. प्रीति मेहता और डॉ. महेश कुमार गैरहाजिर मिले। पैरामेडिकल स्टॉफ में नीलू, दयाशंकर, रजनीश और अमित सोनकर मौजूद नहीं थे। वहीं, संविदा कर्मचारियों में डॉ. फैजल नफीज, डॉ. अपूर्व गुप्ता, डॉ. गीता पोरवाल, डॉ. बी.के. सिंह, डॉ. आर.पी. गुप्ता, डॉ. अरुणेश सिंह, डॉ. बृजेन्द्र कुमार शुक्ला, डॉ. सूरज शिवहरे, डॉ. अल्तमश खान, डॉ. अवधेश कुमार, अरविन्द कुमार, जीनत हाशमी, नाजिया निजाम, अल्का पाण्डेय, अखण्ड प्रताप सिंह और बृजेन्द्र कुमार भी गैरहाजिर पाए गए। इस पर जिलाधिकारी ने सभी का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए।
इनके अलावा अस्थि रोग ओपीडी में डॉ. एस.के. राजपूत मौजूद नहीं मिले, जबकि मरीज बाहर इंतजार करते रहे। ओपीडी में सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा भी अनुपस्थित पाए गए, जबकि उपस्थिति पंजिका में उनके हस्ताक्षर दर्ज थे। जिलाधिकारी ने मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। बाल रोग विभाग की ओपीडी में डॉ. राहुल वर्मा और डॉ. आर.सी. यादव भी मौजूद नहीं मिले। जिलाधिकारी ने सीएमएस को निर्देश दिए कि रोज ओपीडी की निगरानी करे और किसी डॉक्टर के अनुपस्थित रहने पर तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाएं ही लिखे। जरूरत पड़ने पर जन औषधि केंद्र की दवाओं को प्राथमिकता दी जाए।
इस दौरान दो संदिग्ध व्यक्ति भी पकड़े गए, जो मरीजों को गुमराह कर रहे थे। इनके नाम नर्वल तहसील के महोली निवासी विवेक तिवारी और चमनगंज निवासी हैदर अली बताए गए हैंं। जिलाधिकारी ने अस्पताल परिसर में संदिग्ध लोगों पर कड़ी नजर रखने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।
इस दौरान डीएम ने सख्त लहजे में कहा कि अस्पतालों में लापरवाही और डॉक्टरों की गैरहाजिरी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मरीजों को समय पर इलाज मिले और किसी भी दशा में बाहरी दवा न लिखी जाए। अस्पताल परिसर में संदिग्ध लोगों की मौजूदगी भी नहीं होनी चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप