अमेरिका ब्रिटेन सहित 20 से अधिक देशों में पहुंच रही यूपी की कृषि उपज : दिनेश प्रताप सिंह

 


लखनऊ, 27 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के उद्यान एवं कृषि निर्यात मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने गुरूवार को उद्यान निदेशालय में राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की दूसरी बैठक में निर्यात को सुगम बनाने पर चर्चा की। इस अवसर पर मंत्री ने विभाग की एक स्मारिका का विमोचन किया और एक नई वेबसाइट का शुभारम्भ किया।

उद्यान एवं कृषि निर्यात मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की कृषि उपज अमेरिका, यूएई, जर्मनी, ब्रिटेन सहित 20 से अधिक देशों में पहुंच रही है। प्रदेश सरकार ने कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने और कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है।

मंत्री ने कहा कि राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि नई वेबसाइट किसानों और निर्यातकों को यह जानकारी देगी कि उनके जिले की कौन सी उपज किस देश में बेची जा सकती है, संबंधित देश के लिए उत्पाद के क्या मानक आवश्यक हैं और निर्यात के लिए किन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में लगभग 3,000 निर्यातक सक्रिय हैं, जो किसानों की उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। वर्ष 2016-17 में 727 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर 1,132 करोड़ रुपये हो गया।

दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि जेवर एयरपोर्ट के पास एक इंटीग्रेटेड टेस्टिंग ट्रीटमेंट पार्क बनाया जाएगा, जिससे एयर कार्गो के माध्यम से उपज तेजी से पहुंचाई जा सकेगी।

इसके अलावा किसानों को बाजार में भाव स्थिरता के लिए 1000 करोड़ रुपये का भामाशाह भाव स्थिरता कोष स्थापित किया गया है, साथ ही शीतगृह किराये और बीज पर भी छूट दी जा रही है।

कार्यशाला में एपीडा, डेलॉयट, सीआईएसएच और सीआईपीएमए के विशेषज्ञों ने औद्यानिक निर्यात की वर्तमान स्थिति, भविष्य की संभावनाओं, अच्छी कृषि पद्धतियों और निर्यात के लिए आवश्यक मानकों पर तकनीकी जानकारी प्रदान की।

बैठक में उत्पाद की गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय मानकों, पैकेजिंग, पेस्टिसाइड मैनेजमेंट, कोल्ड चेन और निर्यात से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं पर विशेष जोर दिया गया।

इस बैठक में सभी 75 जिलों के किसानों, निर्यातकों और एफपीओ ने भाग लिया, जिसके परिणामस्वरूप निर्यातकों और एफपीओ के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन