देवरिया : राष्ट्रीय लोक अदालत में करीब पाैने तीन लाख मामलों का निस्तारण

 




- 2,79,906 मामलों का निस्तारण , विभिन्न मामलों में प्रतिकर जुर्माना

, और अन्य मदों को मिलाकर 31,37,00,201 रुपये की धनराशि का सेटलमेंट

देवरिया, 12 सितंबर (हि.स.)। । पिछली राष्ट्रीय लोक अदालत की अपेक्षा इस बार अधिक मामलों का निस्तारण किया गया। जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष धनेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में न्यायिक, राजस्व, बैंक एवं अन्य विभागों से संबंधित कुल 2,79,906 मामलों का निस्तारण किया गया। विभिन्न मामलों में प्रतिकर, जुर्माना और अन्य मदों को मिलाकर कुल 31,37,00,201 रुपये की धनराशि का सेटलमेंट हुआ।

राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश धनेन्द्र प्रताप सिंह, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय ब्रजेश मणि त्रिपाठी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी इफ्तेखार अहमद, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज (एसडी) अर्चना द्वितीय तथा अन्य न्यायिक अधिकारियों ने फीता काटकर किया। इसके बाद मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

लोक अदालत के दौरान जनपद न्यायाधीश ने जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से दो लाभार्थियों को पेंशन स्वीकृति प्रमाण पत्र तथा दो लाभार्थियों को सुनने की मशीन प्रदान की। महिला कल्याण विभाग की ओर से चार पात्र महिलाओं को विधवा पेंशन के प्रमाण पत्र और एक लाभार्थी को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का प्रमाण पत्र वितरित किया गया।

जनपद न्यायाधीश ने पांच वादों का निस्तारण करते हुए 2,500 रुपये जुर्माने के रूप में दिलाए। परिवार न्यायालय में भी बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण हुआ। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय ब्रजेश मणि त्रिपाठी ने 25 पारिवारिक वादों का निस्तारण किया, जबकि अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय शिखा रानी जायसवाल ने 27 पारिवारिक वादों का निस्तारण किया। इनमें पांच विवाहित दंपतियों को आपसी विवाद समाप्त कर सुखद विदाई कराई गई।

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में भी लोक अदालत का प्रभाव देखने को मिला। पीठासीन अधिकारी इफ्तेखार अहमद ने कुल 242 मामलों का निस्तारण किया। इन मामलों में पीड़ितों को कुल 21,86,52,800 रुपये की धनराशि प्रतिकर के रूप में दिलाई गई।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रज्ञा सिंह ने 1,629 वादों का निस्तारण किया। वहीं अन्य संबंधित न्यायिक अधिकारियों ने कुल 1,688 मामलों का निस्तारण किया। इस तरह न्यायिक अधिकारियों द्वारा कुल 3,616 मामलों का निस्तारण किया गया।

राजस्व विभाग, बैंक और अन्य विभागों ने बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण किया। इन विभागों के माध्यम से कुल 2,76,290 मामलों का निस्तारण हुआ। न्यायिक और अन्य विभागों के मामलों को मिलाकर राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 2,79,906 मामलों का निस्तारण किया गया। विभिन्न मामलों में प्रतिकर, जुर्माना और अन्य धनराशि को मिलाकर 31,37,00,201 रुपये का सेटलमेंट हुआ।

लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के साथ आपसी सहमति से विवादों का समाधान कराना रहा। लोक अदालत में लंबित मामलों के साथ ही ऐसे मामलों को भी शामिल किया गया, जिनका आपसी सहमति के आधार पर समाधान संभव था। इससे पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली और समय एवं धन की बचत हुई।

कार्यक्रम में नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, बैंक कर्मचारी, पैनल अधिवक्ता, मध्यस्थ, पैरा लीगल वालंटियर (पीएलवी), वादकारी और आम लोग मौजूद रहे।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज (एसडी) अर्चना द्वितीय के प्रयासों से लोक अदालत के सफल आयोजन में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, विभिन्न विभागों, बैंक कर्मियों और अन्य सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक