देवरिया में किसानों ने जेल भरो आंदोलन के तहत किया प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम डीएम को सौंपा मांगपत्र

 


देवरिया, 10 अगस्त (हि.स.)। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को किसानों ने राष्ट्रव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। भारत छोड़ो दिवस की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक चले प्रदर्शन में किसानों ने कृषि, मजदूरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम जिलाधिकारी को मांगपत्र सौंपा। किसानों ने कहा कि कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े लोगों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। मांगपत्र में किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की व्यापक कर्जमाफी की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही। किसानों का कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती ऋणग्रस्तता का असर किसान और मजदूर परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।

किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने और उनके पूर्ण पुनर्वास की मांग की गई। इसके साथ ही 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी किसानों को 10 हजार रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने की मांग भी उठाई गई। किसानों ने सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने तथा एमएसपी पर सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का लागत के आधार पर उचित मूल्य मिलने से खेती को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने और सभी श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग की। मनरेगा को मजबूत करने के साथ प्रत्येक परिवार को साल में 200 दिनों के रोजगार की गारंटी और न्यूनतम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी तय करने की मांग भी की गई।

किसानों ने जबरन भूमि अधिग्रहण और कॉरपोरेट समर्थित भूमि पूलिंग पर रोक लगाने की मांग की। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन कानून-2013, वन अधिकार अधिनियम-2006 और पेसा कानून के तहत मिले अधिकारों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया गया।

इसके अलावा विद्युत निजीकरण विधेयक-2025 और बीज विधेयक-2025 को वापस लेने की मांग उठाई गई। किसानों ने कहा कि नीतियां बनाते समय खेती, किसानों, मजदूरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े लोगों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक