SRN अस्पताल का नाम अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर करने की मांग तेज, अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी

 प्रयागराज। स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) का नाम बदलकर अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह चिकित्सालय किए जाने की मांग को लेकर प्रयागराज में आंदोलन तेज हो गया है। महुआ डाबर संग्रहालय के नेतृत्व में अस्पताल परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक पहुंचे तथा आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
 

प्रयागराज। स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) का नाम बदलकर अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह चिकित्सालय किए जाने की मांग को लेकर प्रयागराज में आंदोलन तेज हो गया है। महुआ डाबर संग्रहालय के नेतृत्व में अस्पताल परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक पहुंचे तथा आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश इस समय आजादी का अमृत काल मना रहा है और वर्ष 2026 ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन की 100वीं वर्षगांठ का वर्ष है। ऐसे में 9 अगस्त को मनाए जाने वाले काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस से पहले अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को उनके बलिदान के अनुरूप राष्ट्रीय सम्मान दिया जाना चाहिए।

वक्ताओं ने कहा कि शाहजहांपुर में जन्मे ठाकुर रोशन सिंह ने पंडित राम प्रसाद 'बिस्मिल', अशफाक उल्ला खां और शचीन्द्रनाथ बख्शी जैसे क्रांतिकारियों के साथ मिलकर अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया। काकोरी प्रकरण में अंग्रेजों ने उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई और 19 दिसंबर 1927 को प्रयागराज की तत्कालीन मलाका जेल में उन्होंने वंदे मातरम् और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया।

इसी जगह पर रोशन सिंह को हुई थी फांसी
आंदोलनकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर आज स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय संचालित हो रहा है, वहीं कभी अंग्रेजों की ऐतिहासिक मलाका जेल थी, जहां ठाकुर रोशन सिंह को कैद रखा गया और फांसी दी गई थी। उनका कहना है कि परिसर में आज भी उनकी प्रतिमा स्थापित है, लेकिन अस्पताल का नाम अब भी स्वरूप रानी नेहरू के नाम पर है। ऐसे में जिस धरती ने एक अमर क्रांतिकारी के सर्वोच्च बलिदान को देखा, उस संस्थान का नाम भी उनके नाम पर होना चाहिए।

महुआ डाबर संग्रहालय के निदेशक एवं क्रांतिकारी शहीद वंशज डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन की 100वीं वर्षगांठ इस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का सबसे उपयुक्त अवसर है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि एसआरएन अस्पताल का नाम बदलकर "अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह चिकित्सालय" किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां स्वतंत्रता संग्राम के इस महानायक के बलिदान से प्रेरणा ले सकें।

धरने में डॉ. अवनीश सिंह, निशांत मोदनवाल, प्रवेश मिश्रा, रिशुराज आनंद, हिमांशु सिंह, शिवांग त्रिपाठी, भानु प्रताप सिंह, शिवम पाठक, विपुल तिवारी, प्रमोद अग्रवाल, प्रियांशु रंजन, शुभम सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र, युवा और नागरिक मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने कहा कि मांग पूरी होने तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।