दासता के प्रतीक ग्रांट गंज का नाम बदलकर रखा जाए मुंशी प्रेमचंद वार्ड : तारा पाटकर

 


महोबा, 31 जुलाई (हि.स.)।यूपी के महोबा में हिन्दी के महान साहित्यकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर बुंदेली समाज ने शुक्रवार को ग्रांट गंज वार्ड का नाम बदलकर मुंशी प्रेमचंद के नाम पर करने की मांग की। संयोजक तारा पाटकर बुंदेलखंडी ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजकर कहा कि यहीं उनकी कर्मभूमि रही है और यहीं वे नबाव राय से मुंशी प्रेमचंद बने लेकिन नगर के जिस ग्रांटगंज वार्ड में वे रहते थे, वह एक अंग्रेज अफसर ग्रांट के नाम पर है जो 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के दौरान मारा गया था और इस नाम से गुलामी की बू आती है।

बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि 1880 में वाराणसी के लमही गांव में जन्मे मुंशी प्रेमचंद का मूल नाम धनपतराय श्रीवास्तव था। महोबा उनके साहित्यिक सफर का सबसे महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। प्रेमचंद ने 15 उपन्यासों सहित 300 से ज्यादा रचनाएं लिखीं। उनकी रचनाओं से प्रभावित होकर बंगाल के मशहूर साहित्यकार शरदचंद्र चट्टोपाध्याय ने मुंशी प्रेमचंद को उपन्यास सम्राट की उपाधि प्रदान की थी।

उन्हाेंने बताया कि मुंशी प्रेमचंद जनपद मुख्यालय में 1909-1914 तक ग्रांट गंज वार्ड के जिस मकान में किराए से रहते थे, वह मकान कुछ साल पहले पूरी तरह ढह गया, प्रशासन उसे संरक्षित कर संग्रहालय बना सकता था, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। गोदान, गबन, कर्मभूमि, निर्मला, नमक का दरोगा, दो बैलों की जोड़ी व बड़े घर की बेटी जैसी मशहूर रचनाओं से अमर हो चुके उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद शिक्षा विभाग में सब डिप्टी इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल पद पर तैनात थे। उन्होंने यहां जो सोज-ए-वतन पुस्तक लिखी, उससे हमीरपुर के तत्कालीन अंग्रेज कलेक्टर नाराज हो गए और उन्हें दंडित करते हुए लिखने पर प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही सोज-ए-वतन की प्रतियां भी जलवा दीं। अपने मित्रों की सलाह पर कुछ समय बाद उन्होंने नाम बदलकर मुंशी प्रेमचंद नाम से लिखना शुरू किया और बड़े घर की बेटी कहानी यहीं लिखी।

तारा पाटकर ने कहा कि यह न केवल उस महान शख्सियत का अनादर है बल्कि नगरवासियों के उन जख्मों को कुरेदने वाला है जो अंग्रेजी हुकूमत के दौरान मिले थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि आपने गुलामी के प्रतीक रहे तमाम शहरों के नाम बदलवाए हैं। महोबा के ग्रांट गंज वार्ड का नाम बदलवा कर मुंशी प्रेमचंद के नाम पर करवा दीजिए। बुंदेली समाज पिछले कई साल से इसकी मांग कर रहा है। इसे लेकर जिलाधिकारी को कई बार ज्ञापन दे चुका है लेकिन अब तक हुआ कुछ नहीं। नगर में उनकी जो निशानियां थीं, वे भी ज्यादातर मिट चुकी हैं। उपन्यास सम्राट की स्मृतियों को जिंदा रखने के लिए महोबा में उनकी एक मूर्ति स्थापित करने की मांग भी की गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / उपेन्द्र द्विवेदी