डीडीयू में नवप्रवेशित छात्रों की प्रथम सेमेस्टर परीक्षाएं मिश्रित पद्धति से होंगी

 






गोरखपुर, 06 अक्टूबर (हि.स.)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में नवप्रवेशित विद्यार्थियों की प्रथम सेमेस्टर परीक्षाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कुलपति प्रो. के.पी. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित परीक्षा समिति की बैठक में आगामी परीक्षाओं के संचालन, प्रश्नपत्र की व्यवस्था, मूल्यांकन, प्रायोगिक परीक्षाओं और मिड-टर्म मूल्यांकन से संबंधित कई अहम निर्णय लिए गए।

परीक्षा समिति ने तय किया कि नवप्रवेशित विद्यार्थियों यानी प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों की परीक्षाएं मिश्रित (मिक्स्ड) पद्धति से आयोजित की जाएंगी। इसमें वस्तुनिष्ठ और वर्णनात्मक दोनों प्रकार के प्रश्न शामिल होंगे। इस निर्णय से विद्यार्थियों का मूल्यांकन बहुविकल्पीय प्रश्नों के साथ-साथ उनकी लिखित अभिव्यक्ति और विषय की समझ के आधार पर भी किया जाएगा।

35 एमसीक्यू, पांच लघु और दो दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रथम सेमेस्टर के प्रश्नपत्र में कुल 35 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) होंगे। प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा और वस्तुनिष्ठ खंड कुल 35 अंकों का रहेगा। इसके अलावा पांच लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक प्रश्न चार अंक का होगा और विद्यार्थियों को प्रत्येक का उत्तर लगभग 100 शब्दों में देना होगा।

परीक्षा में दो दीर्घ उत्तरीय प्रश्न भी होंगे। प्रत्येक प्रश्न 10 अंकों का होगा और विद्यार्थियों को लगभग 200 शब्दों में उत्तर देना होगा। इस प्रकार प्रश्नपत्र कुल 75 अंकों का होगा। वर्णनात्मक प्रश्नों के उत्तर विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिका में निर्धारित स्थान पर ही लिखने होंगे।

तृतीय, पंचम और सप्तम सेमेस्टर की परीक्षा व्यवस्था पूर्ववत

परीक्षा समिति ने स्पष्ट किया कि तृतीय, पंचम एवं सप्तम सेमेस्टर की परीक्षाएं पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार आयोजित होंगी। बीए एलएलबी आदि पाठ्यक्रमों के संबंधित विषम सेमेस्टरों में पूर्व निर्धारित बहुविकल्पीय प्रश्न पद्धति (MCQ) ही लागू रहेगी।

20 नवंबर तक पूरी करनी होंगी प्रायोगिक परीक्षाएं

विश्वविद्यालय ने प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर भी स्पष्ट समय-सीमा तय की है। सभी संबद्ध महाविद्यालयों को 20 नवंबर तक प्रायोगिक परीक्षाएं अनिवार्य रूप से संपन्न करानी होंगी। इसके बाद 25 नवंबर तक प्रायोगिक परीक्षाओं के अंक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा में यदि किसी महाविद्यालय द्वारा प्रायोगिक परीक्षा आयोजित नहीं कराई जाती है तो संबंधित विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा विश्वविद्यालय स्तर से कराई जाएगी। इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर अथवा किसी अन्य संबद्ध महाविद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया जा सकता है।

दो मिड-टर्म मूल्यांकन में बेहतर अंक होंगे मान्य

बैठक में मिड-टर्म मूल्यांकन को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। सभी सेमेस्टर के विद्यार्थियों के दो मिड-टर्म मूल्यांकन कराए जाएंगे। पहला मूल्यांकन 20 अक्टूबर से पहले और दूसरा 20 नवंबर से पहले कराया जाना होगा।

दोनों मिड-टर्म मूल्यांकनों में विद्यार्थी द्वारा प्राप्त अधिकतम अंक को अंतिम रूप से मान्य किया जाएगा। यदि किसी विद्यार्थी का किसी कारणवश एक मिड-टर्म मूल्यांकन छूट जाता है तो उसके द्वारा दिए गए एकमात्र मूल्यांकन में प्राप्त अंक ही अंतिम रूप से मान्य होंगे। सभी विद्यार्थियों के मिड-टर्म मूल्यांकन के अंक भी 25 नवंबर तक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।

कृषि और पीजी की परीक्षाएं पूर्ववत वर्णनात्मक पद्धति से

परीक्षा समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों की परीक्षाएं पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार वर्णनात्मक (सब्जेक्टिव) पद्धति से ही आयोजित की जाएंगी। इसी प्रकार परास्नातक (पीजी) स्तर के सभी पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं भी पूर्व की भांति वर्णनात्मक पद्धति से होंगी।

परीक्षा समिति के इन निर्णयों से विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की परीक्षा व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित महाविद्यालयों को निर्धारित समय-सारिणी और परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि परीक्षाओं, मूल्यांकन और प्रायोगिक कार्यों की प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी की जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय