सीएसजेएमयू के डॉ. नमिता तिवारी का शाेध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित होने के लिए चयनित

 


कानपुर, 10 जनवरी (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद में कल्याणपुर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय शोध मानचित्र पर मजबूती से उभरा है। विश्वविद्यालय की डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) डॉ. नमिता तिवारी का सह-लेखकों के साथ किया गया एक महत्वपूर्ण शोध कार्य प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल साधना- एकेडमी प्रोसीडिंग्स इन इंजीनियरिंग साइंसेज में प्रकाशित होने के लिए चयनित हुआ है। यह शोध भविष्य की डिजिटल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी क्षेत्र से जुड़ा है। यह जानकारी शनिवार को सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने दी।

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि शोध में उन क्रिप्टोग्राफिक तकनीकों का विश्लेषण किया गया है, जिन्हें क्वांटम कंप्यूटरों के युग में भी सुरक्षित माना जा रहा था। विशेष रूप से अध्ययन का केंद्र लिंकेबल रिंग सिग्नेचर स्कीम्स रही हैं, जिनका उपयोग ई-वोटिंग सिस्टम, ई-कैश, ब्लॉकचेन तकनीक और सुरक्षित डिजिटल प्रमाणीकरण जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किया जाता है।

कुलपति ने कहा कि इन तकनीकों का मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ता की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखना होता है। हालांकि, शोध के निष्कर्ष चौंकाने वाले हैं। अध्ययन में यह सामने आया है कि कुछ पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफिक स्कीम्स उपयोगकर्ता की पूर्ण अनॉनिमिटी सुनिश्चित करने में विफल हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में हस्ताक्षरकर्ता की पहचान अप्रत्यक्ष रूप से उजागर हो सकती है। यह स्थिति न केवल व्यक्तिगत गोपनीयता के लिए खतरा है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं जैसे ई-वोटिंग और वित्तीय प्रणालियों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने बताया कि शोध की खास बात यह है कि इसमें कोई नया एल्गोरिद्म प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों का गहन क्रिप्टो-विश्लेषणात्मक मूल्यांकन किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भविष्य में उपयोग की जाने वाली डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों को लागू करने से पहले उनकी गहराई से जांच आवश्यक है, ताकि संभावित खामियों को समय रहते दूर किया जा सके।

डॉ. नमिता तिवारी ने कहा कि यह शोध ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘साइबर सुरक्षा’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि क्वांटम युग में प्रवेश से पहले डिजिटल प्रणालियों की मजबूती सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। यह शोध नीति निर्माताओं, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस उपलब्धि को सीएसजेएमयू के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार के शोध कार्य संस्थान की अंतरराष्ट्रीय पहचान को सशक्त बनाते हैं और छात्रों व शोधार्थियों को उच्चस्तरीय अनुसंधान के लिए प्रेरित करते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / मो0 महमूद