भारत-रूस तकनीकी सहयोग में सीएसजेएमयू की नई पहल, ड्रोन तकनीक पर शुक्रवार काे होगा समझौता : आलोक कुमार
कानपुर, 26 मार्च (हि.स.)। “भारत-रूस तकनीकी सहयोग के तहत ड्रोन तकनीक और मानवरहित हवाई वाहन के क्षेत्र में यह पहल विश्वविद्यालय को उभरती तकनीकों में अग्रणी बनाएगी और छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगी,” यह बातें गुरुवार को यूआईईटी के निदेशक डॉ. आलोक कुमार ने कहीं।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (यूआईईटी) में रूस की अग्रणी कंपनी जियोस्कैन रूस के साथ ड्रोन तकनीक एवं मानवरहित हवाई वाहन उड़ान क्षेत्र के लिए समझौता ज्ञापन पर शुक्रवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे।
इस समझौते के माध्यम से विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक, मानवरहित हवाई वाहन डिजाइन, उड़ान नियंत्रण प्रणाली, मानचित्रण और सर्वेक्षण जैसी तकनीकों पर कार्य किया जाएगा। जियोस्कैन रूस के सहयोग से छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण प्राप्त होगा।
कार्यक्रम के बाद कुलपति द्वारा तीन अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं—ड्रोन प्रयोगशाला, साइबर सुरक्षा प्रयोगशाला और नवाचार (आइडिया) प्रयोगशाला का उद्घाटन किया जाएगा। ड्रोन प्रयोगशाला में छात्र ड्रोन डिजाइन, प्रोग्रामिंग और उड़ान परीक्षण पर कार्य कर सकेंगे, जबकि साइबर सुरक्षा प्रयोगशाला में एथिकल हैकिंग, नेटवर्क सुरक्षा और डाटा संरक्षण की ट्रेनिंग दी जाएगी।
वहीं नवाचार प्रयोगशाला के माध्यम से छात्रों को स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा, जहां वे अपने विचारों को प्रारूप (प्रोटोटाइप) में विकसित कर सकेंगे।
इस पहल से छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, उद्योग आधारित कौशल, अंतरराष्ट्रीय कार्यशालाएं और शोध के नए अवसर मिलेंगे, साथ ही रोजगार और प्लेसमेंट की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप