सीएसजेएमयू का नया कोर्स एआई से खबर लिखने और डेटा पड़ताल की देगा सीख,पत्रकारिता में बनाएगा दक्ष

 


कानपुर, 09 अगस्त (हि.स.)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को पत्रकारिता का विकल्प नहीं, बल्कि पत्रकारों की क्षमता बढ़ाने वाला सहयोगी बनाना जरूरी है। मीडिया में तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं और ऐसे में विद्यार्थियों के साथ काम कर रहे पत्रकारों को भी एआई के जिम्मेदार इस्तेमाल की जानकारी होनी चाहिए। यह बातें रविवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहीं।

उन्होंने बताया कि विभाग ने मीडिया के लिए छह माह का ‘सर्टिफिकेट कोर्स इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर मीडिया’ शुरू किया है। हाइब्रिड माध्यम से संचालित होने वाले इस पाठ्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग शहरों में रहने वाले विद्यार्थी और मीडिया से जुड़े पेशेवर ऑनलाइन जुड़ सकेंगे। पाठ्यक्रम की फीस 10 हजार दो सौ रुपये निर्धारित की गई है।

खबर से लेकर वीडियो तक एआई का व्यावहारिक प्रशिक्षण

कोर्स की खासियत केवल एआई की सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं है। इसमें प्रतिभागियों को यह सिखाया जाएगा कि समाचार की तैयारी, शोध, सामग्री निर्माण, आंकड़ों के विश्लेषण और मल्टीमीडिया पत्रकारिता में एआई का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है।

पाठ्यक्रम को पांच हिस्सों में तैयार किया गया है। पहले चरण में एआई और पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की जाएगी। दूसरे चरण में एआई उपकरणों और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के जरिए समाचार, फीचर, डिजिटल सामग्री और सामाजिक माध्यमों के लिए सामग्री तैयार करने का प्रशिक्षण मिलेगा।

तीसरे हिस्से में प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, स्वचालित पत्रकारिता और डेटा पत्रकारिता पर जोर रहेगा। प्रतिभागी बड़ी मात्रा में उपलब्ध सूचनाओं और आंकड़ों को समझकर उनसे खबर या कहानी तैयार करने की प्रक्रिया सीखेंगे।

चौथे चरण में मल्टीमीडिया पत्रकारिता के साथ मीडिया नैतिकता को जोड़ा गया है। एआई से तैयार फोटो-वीडियो, डीपफेक, गलत सूचना, कॉपीराइट, गोपनीयता और सामग्री की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।

केवल प्रमाणपत्र नहीं, तैयार होगा काम का पोर्टफोलियो

पांचवें चरण में व्यावहारिक प्रयोगशाला और अंतिम परियोजना रखी गई है। इसमें प्रतिभागी सीखे गए एआई उपकरणों का वास्तविक मीडिया कार्यों में इस्तेमाल करेंगे और एक परियोजना तैयार करेंगे। इससे उनके पास प्रमाणपत्र के साथ व्यावहारिक अनुभव और काम दिखाने के लिए परियोजना भी तैयार होगी।

कोर्स की समन्वयक डॉ. होइमावती तालुकदार ने कहा कि आज के पत्रकार के लिए तकनीक को समझना उतना ही जरूरी है, जितना खबर लिखना। उनका कहना है कि पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को एआई से डरने के बजाय उसे समझकर पत्रकारिता को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इस्तेमाल करने के लिए तैयार करना है।

यह पाठ्यक्रम पत्रकारिता के विद्यार्थियों के अलावा रिपोर्टर, कॉपी राइटर, डिजिटल पत्रकार, सामाजिक माध्यम प्रबंधक, सामग्री निर्माता, वीडियो निर्माता और मीडिया शोधार्थियों के लिए भी उपयोगी होगा। हाइब्रिड व्यवस्था के कारण नौकरी या अन्य जिम्मेदारियों के साथ जुड़े पेशेवर भी प्रशिक्षण ले सकेंगे। पाठ्यक्रम की अवधि छह माह और संचालन का माध्यम हाइब्रिड रहेगा।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप