बच्चों के विकास में रचनात्मक गतिविधियों की अहम भूमिका : प्रो. भरत राज सिंह
लखनऊ, 08 अप्रैल (हि.स.)। रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण आधार है और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के अधिक अवसर मिलने चाहिए। इस तरह के आयोजनों से बच्चों में आत्मविश्वास और सांस्कृतिक समझ विकसित होती है। कला के माध्यम से वे अपनी भावनाओं और विचारों को बेहतर ढंग से अभिव्यक्त कर पाते हैं। समाज को भी ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देना चाहिए ताकि नई पीढ़ी सशक्त बन सके। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं बच्चों में आत्मविश्वास, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना का विकास करती हैं यह बातें बुधवार को महानिदेशक (तकनीकी) प्रो. भरत राज सिंह ने कही।
विराम खंड-5 जन कल्याण समिति द्वारा सोमेश्वर महादेव मंदिर, एम.आई.जी. परिसर में आयोजित बाल चित्रशाला प्रतियोगिता एवं समापन समारोह उत्साह एवं उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. भरत राज सिंह, महानिदेशक (तकनीकी), एसएमएस तथा अध्यक्ष, विराम-5 जनकल्याण उपसमिति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों के लिए दो आयु वर्गों – 10 वर्ष तक तथा 15 वर्ष तक – में चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। मुख्य अतिथि ने विजेता बच्चों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र वितरित किए और उनकी प्रतिभा की सराहना की। इस अवसर पर 4-5 अप्रैल को मधुबनी चित्रकला कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पारम्परिक कला के विभिन्न पहलुओं को सीखा।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. आरपी शर्मा एवं और उनकी पत्नी द्वारा किया गया, जबकि संयोजन अरुण त्रिवेदी, सचिव, विराम-5 जनकल्याण उपसमिति ने किया। बच्चों के चित्रों का मूल्यांकन डॉ. गर्ग द्वारा किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में बच्चों, अभिभावकों एवं परिवारजनों की उपस्थिति रही, जिन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप