परमार्थ त्रिवेणी पुष्प पर सम्पन्न हुआ भगवान श्री जगन्नाथ जी की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान
--आयार्च, पुरोहित और बटुकों के लिए हुआ विशाल महाभोग भंडारा
--स्वामी चिदानन्द सरस्वती का पावन संदेश ‘‘राष्ट्र से राम और राम से राष्ट्र’’
प्रयागराज, 26 फरवरी (हि.स)। परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज के दिव्य संगम तट पर भगवान श्री जगन्नाथ की प्राणप्रतिष्ठा का भव्य, अलौकिक और वैदिक अनुष्ठान अत्यंत श्रद्धा, शास्त्रीय विधि-विधान तथा वेदमंत्रों के पवित्र उच्चारण के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय एकात्मता का विराट उत्सव रहा।
गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन तट पर शंखध्वनि, घंटानाद, हवन की सुगंध और वैदिक ऋचाओं की मधुर गूंज के साथ देवभूमि गूंजायमय रही। आचार्यों, पुरोहितों और वेदपाठी बटुकों द्वारा सम्पन्न प्राण प्रतिष्ठा की प्रत्येक क्रिया अत्यंत सूक्ष्म, शुद्ध और शास्त्र सम्मत थी। आज प्रातःकाल सूर्य पूजन के साथ ही भगवान श्री जगन्नाथ जी की प्रतिमा में प्राणों का आवाहन होते ही वातावरण ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
गुरूवार को इस पावन अवसर पर जगन्नाथ पुरी से आये महाराजों ने महाप्रसाद, महाभोग बनाया। इस अवसर पर विशाल महाभंडारे का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं, संतों, आचार्यों, पुरोहितों और बटुकों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन सनातन दर्शन की उसी अखंड परम्परा का स्मरण कराता है, जिसे आदि काल से ऋषि-मुनियों ने पोषित किया है। जिस प्रकार आदि शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में चार धामों की स्थापना कर भारतवर्ष को आध्यात्मिक एकता के सूत्र में बांधा, उसी दिव्य भावना को वर्तमान युग में पुनर्जीवित करते हुए स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने संगम की इस पावन भूमि पर चारों धामों की चेतना का संगम साकार किया। यह केन्द्र राष्ट्र एकता का संवाहक बना कर आने वाली पीढ़ियों को ‘‘राष्ट्र प्रथम और संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्’’ का संदेश प्रसारित करना रहेगा।
परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में निर्मित यह आध्यात्मिक केंद्र एक तीर्थ के साथ समग्र भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को चारों धाम तथा उत्तराखंड के पावन धामों के दर्शन और अनुभव एक ही स्थल पर प्राप्त होंगे। श्रद्धालु संगम की इस भूमि पर ही सम्पूर्ण धामों का पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे।
संगम की पावन रेत पर सम्पन्न यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। जो यह संदेश देता है कि जब आस्था और संगठन साथ आते हैं, तब संस्कृति पुनर्जागृत होती है, राष्ट्र सशक्त होता है और मानवता आलोकित होती है। भगवान श्री जगन्नाथ की यह प्राणप्रतिष्ठा सनातन चेतना के नवजागरण का शंखनाद है, जो प्रत्येक हृदय में श्रद्धा, शक्ति और शांति का संचार कर समस्त विश्व को “वसुधैव कुटुम्बकम्” का मार्ग दिखाता है। विनोद बागरोडिया, रजत बागरोडिया, उपासना बागरोडिया सम्पूर्ण बागरोडिया परिवार एवं आभा बागरोडिया चैरिटेबल ट्रस्ट के सौजन्य से यह दिव्य आयोजन सम्पन्न हो रहा है।
मीडिया प्रभारी ने बताया कि भगवान श्री जगन्नाथ जी की प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान एवं विशाल महाभोग भंडारा संत स्वामी ईश्वरदास भगीरथी आश्रम हरिद्वार, स्वामी ज्योतिर्मयानन्द सरस्वती रायबरेली आश्रम, स्वामी धर्मात्मानन्द सरस्वती परमार्थ आश्रम हरिद्वार, गोरखपुर मठ से स्वामी शुक्रायनाथ, मठ श्री बाघम्बरी गद्दी मन्दिर श्री बड़े हनुमान जी मन्दिर, स्वामी शिवा गिरी, स्वामी रजनीश पुरी, स्वामी महेन्द्र पुरी, त्रिवेणी शरण महाराज आदि वेणी माधव, राजा रामदास, फलाहारी आश्रम और अनेक संतों के पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद से सम्पन्न हुआ।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर प्रसि़द्ध उद्योगपति व समाज सेवी राधेश्याम गोयनका, प्रसि़द्ध उद्योगपति अतुल सुल्तानिया, प्रसि़द्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी, राधेश्याम अग्रवाल, पूर्व मुख्य सचिव उप्र दुर्गा शंकर मिश्रा, रूपा ग्रुप्स, प्रसि़द्ध उद्योगपति एवं समाज सेवी, कुंज बिहारी अग्रवाल, प्रसि़द्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी, दिनेश शाहरा, कमिश्नर विमल कुमार दुबे और अनेक विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, संगम तट प्रयागराज में भगवान श्री जगन्नाथ की प्राणप्रतिष्ठा अनुष्ठान हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र