भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और लोकजीवन की आत्मा है गाय : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
गोरखपुर से 81 दिवसीय गोविष्टि यात्रा का शंखनाद, गोरक्षा को जनआंदोलन बनाने का आह्वान
गोरखपुर, 04 मई (हि.स.)। रामगढ़ताल के किनारे सहारा स्टेट स्थित भारत माता की प्रतिमा के समक्ष रविवार को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 81 दिवसीय 'गोविष्टि यात्रा'का विधिवत शुभारंभ किया। शंखनाद,पूजा-अर्चना और सामूहिक संकल्प के बीच शुरू हुई इस यात्रा का उद्देश्य गायों के संरक्षण,गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने तथा गोरक्षा को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और लोकजीवन की आत्मा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गोरक्षा के लिए अब केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक स्तर पर भी सक्रिय होना होगा। इसी संदर्भ में उन्होंने 'एक नोट और एक वोट' का मंत्र देते हुए लोगों से अपील की कि वे अपने मताधिकार का उपयोग ऐसे जनप्रतिनिधियों के समर्थन में करें,जो गोरक्षा के प्रति स्पष्ट रूप से प्रतिबद्ध हों।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि गोरक्षा के नाम पर किसी प्रकार की हिंसा स्वीकार्य नहीं है। 'हमें किसी को आग नहीं लगानी,न ही किसी के साथ अन्याय करना है। लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति वोट है और उसी के माध्यम से व्यवस्था परिवर्तन संभव है'।
गोमाता को राज्य एवं राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग
शंकराचार्य ने गाय को राज्य माता और राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को दोहराते हुए कहा कि इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संकल्प दिलाया—'मैं घोषणा करता हूं कि गाय हमारी माता है।' उन्होंने कहा कि गोरक्षा केवल नारे तक सीमित न रहकर सामाजिक और राजनीतिक प्राथमिकता बननी चाहिए।
सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
अपने संबोधन में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और भाजपा की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि सत्ता में वास्तविक इच्छाशक्ति होती, तो गोमाता को राज्य माता घोषित करने की दिशा में ठोस पहल होती। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के कारण स्पष्ट निर्णय लेने से बचा जा रहा है।
हिंदू समाज को स्पष्टता नहीं,कौन उनके हित में खड़ा
शंकराचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि समाज के सामने यह स्पष्ट नहीं है कि कौन वास्तव में उसके हित में खड़ा है। उन्होंने दावा किया कि यात्रा के दौरान वे 37 से अधिक ऐसे कानूनों पर चर्चा करेंगे, जिन्हें वे हिंदू विरोधी मानते हैं। साथ ही मंदिरों,परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों पर भी चिंता व्यक्त की।
403 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगी यात्रा
यह गोविष्टि यात्रा गोरखपुर ग्रामीण से प्रारंभ होकर गोरखपुर शहर में सम्पन्न होगी और उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक चलने वाली इस यात्रा में शंकराचार्य अपने रथ से गांव-गांव और नगर-नगर जाकर गोरक्षा का संदेश देंगे। यात्रा का समापन 23 जुलाई को गोरखपुर में एक विशाल जनसभा के साथ होगा।
चिल्लूपार व सहजनवा में स्वागत, शंकराचार्य की उतारी आरती
यात्रा के दौरान चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने संत वेश में शंकराचार्य का स्वागत कर आरती उतारी। सहजनवा क्षेत्र में भी श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर दर्शन किए और गोरक्षा का संकल्प लिया।
29 शर्तों के साथ मिली प्रशासनिक अनुमति
जिला प्रशासन ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए 29 शर्तों के साथ अनुमति प्रदान की थी। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समर्थक और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
अंत में शंकराचार्य ने कहा कि गोरक्षा केवल धार्मिक विषय नहीं,बल्कि भारतीय संस्कृति,करुणा और मानवीय मूल्यों की रक्षा का अभियान है। 'जब समाज गाय को सच्चे अर्थों में माता मानेगा,तभी उसकी सुरक्षा के लिए निर्णायक परिवर्तन संभव होगा'।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय