लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों से देवा मेले में बिखरे संस्कृति के रंग

 


बाराबंकी, 02 नवंबर (हि.स.)। देवा मेला-2026 की सांस्कृतिक संध्या में रविवार को लोक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारतीय लोक संस्कृति से रूबरू कराया। सांस्कृतिक लोकदल की नृत्यांगना दीपशिखा और उनकी साथी कलाकारों ने पारंपरिक लोकगीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। कलाकारों की भावपूर्ण अदाकारी और लयबद्ध नृत्य ने मंच पर लोकपरंपराओं की खूबसूरत छटा बिखेर दी।

कार्यक्रम की शुरुआत उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध लोकनृत्य ढेड़िया से हुई। 'चलो ढेड़िया उतार सावर गोरिया ना' गीत की धुन पर कलाकारों ने पारंपरिक अंदाज में शानदार प्रस्तुति दी। इसके बाद झूमर गीत पर आधारित नृत्य ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं, 'पूर्वी हरि-भरी धरती' गीत पर प्रस्तुत नृत्य के माध्यम से ग्रामीण जीवन, लोकपरंपराओं और मिट्टी की सौंधी खुशबू को जीवंत किया गया।

कलाकारों की आकर्षक वेशभूषा, भाव-भंगिमाओं और बेहतरीन तालमेल ने प्रस्तुतियों में चार चांद लगा दिए। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम में दीपशिखा के साथ वंशिका, पायल, सिद्धि, दीपाली, ऐश्वर्या, लाडो सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। लोकगीतों और नृत्यों की इस प्रस्तुति ने देवा मेले की सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज कुमार चतुवेर्दी