भारतीय लोक संस्कृति हमारी सांस्कृतिक पहचान की आधारशिला : न्यायमूर्ति
--आस्था समिति के लोकरंग बहार कार्यक्रम में बिखरे लोक संस्कृति के रंग
--पिया मेहंदी लिया दा मोती झील से ना
प्रयागराज, 24 जून (हि.स)। सांस्कृतिक संस्था आस्था समिति एवं रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज राजापुर प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित लोकरंग बहार कार्यक्रम बुधवार शाम को विद्यालय में अत्यंत उत्साह एवं उल्लास वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में लोकगीतों एवं लोकनृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों एवं श्रोताओं को भारतीय लोक संस्कृति की समृद्ध परम्पराओं से रुबरु कराया, कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने प्रेक्षागृह को लोकरंगों से रंग दिया। लोक कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी ने कहा कि भारतीय लोक संस्कृति हमारी सांस्कृतिक पहचान की आधारशिला है। लोक कलायें हमारी सभ्यता और परम्पराओं को जीवित रखने का कार्य करती हैं। उन्होंने युवाओं से लोक संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ ख्यातिप्राप्त लोक नृत्यांगना बीना सिंह द्वारा गणेश वंदना पर आधारित मनोहारी लोकनृत्य की प्रस्तुति से हुआ। आकर्षक वेशभूषा, भावपूर्ण अभिनय और लयबद्ध नृत्य ने कार्यक्रम के आरम्भ में ही दर्शकों का मन मोह लिया। इसके बाद लोकगीत गायिका कृति श्रीवास्तव ने लोकगीत ‘पिया मेहंदी लिया दा मोती झील से, जाईके साइकिल से ना’ प्रस्तुत कर दर्शकों को झूमने पर विवश किया। इसके बाद उन्होंने देवी गीत ‘सबही के असरा तोहार, पार मोरी कईदा नवरिया’ प्रस्तुत कर भक्तिमय वातावरण का सृजन किया। ऐश्वर्या श्रीवास्तव ने ‘हमरी नगरिया मइया भरेली खपरिया, हो चुनरिया लहरें ना’ गीत के माध्यम से लोकभक्ति और लोक संवेदना का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया। कीर्ति चौधरी ने सावन की मधुर अनुभूतियों से ओतप्रोत लोकगीत ‘अरि अम्मा मोरी बाबा को भेजो री, के सावन आयो रे’ प्रस्तुत दर्शकों की वाहवाही लूटी।
अगली प्रस्तुति में लोक गायिका ज्योति आनंद ने लोक जीवन की भावनाओं को स्वर देते हुये ‘काहे को ब्याही बिदेस अरे लखिया बाबुल मोरे’ गीत की मार्मिक प्रस्तुति देकर उपस्थित दर्शकों को भावुक कर दिया। युवा लोक गायिका शिखा त्रिपाठी ने अपनी सुमधुर आवाज में लोकप्रिय गीत ‘तोहरा बलम कप्तान हो सखी, हमरो किसान बा’ प्रस्तुत किया। जिसमें ग्रामीण जीवन, लोकभावना और सामाजिक यथार्थ का सुंदर समन्वय देखने को मिला। इसके बाद शिखा ने एक अन्य लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर प्रेक्षागृह को लोकसंगीत की रसधारा में सराबोर कर दिया। उनकी भावपूर्ण गायिकी, लोकधुनों की मिठास और सहज प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गायन के साथ-साथ बीना सिंह और सखियों द्वारा ढेड़िया नृत्य, राजस्थानी नृत्य सहित कई नृत्य प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम का समापन बीना सिंह और उनके ग्रुप द्वारा आकर्षक मयूर नृत्य एवं फूलों की होली के साथ हुआ। कलाकारों ने मयूर की चंचलता, सौंदर्य और प्रकृति के प्रति उसके अनुराग का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया। इस मयूर नृत्य में ऐश्वर्या, गौरी, आयुषी, इर्षिता, प्रियांशी, कुमकुम, तूलिका, स्तुति, नीशू, सीमा गोविंदानी ने भी अपने नृत्य की भाव भंगिमाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इनके साथ अभय चंद्रा ने बैंजो, शिवम यादव ने सिंथेसाइजर, प्रथम भट्ट ने ढोलक तथा सूजल भट्ट ने ऑक्टोपैड पर संगत करके गायन में चार चांद लगा दिया।
संस्था के महासचिव मनोज कुमार गुप्ता ने संस्था की गतिविधियों एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुये कहा कि आस्था समिति निरंतर भारतीय लोक संस्कृति, लोक कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती है। भविष्य में भी इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे। कार्यक्रम के संयोजक पंकज गौड़ ने कहा कि लोकरंग बहार कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना तथा लोक कला के प्रति जनजागरुकता बढ़ाना है। संस्था के अध्यक्ष बृजराज तिवारी एवं कोषाध्यक्ष अनूप केसरवानी ने अतिथियों, कलाकारों, सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि हमारी संस्था भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों-युवाओं को भारतीय लोक कला के प्रति जागरूक करती रहेगी और नवोदित कलाकारों को प्रोत्साहित करती रहेगी।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों में महापौर गणेश चंद केसरवानी, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा, रानी रेवती देवी के प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह, प्रबंधक राकेश सिंह सेंगर, समाजसेवी एवं संस्कृतिकर्मी प्रमोद कुमार बंसल प्रमुख रूप से उपस्थित थे। मंच संचालन संजय पुरुषार्थी ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र