राजा-महाराजाओं के जमाने से कायम है रामनगर क्षेत्र की रंग परम्परा
बाराबंकी 27 फ़रवरी (हि.स.)। बाराबंकी जिले के रामनगर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में जहां होली की दोपहर तक रंग चलता है वहीं कस्बा रामनगर में पूरे दिन भर रंग खेला जाता है। इस परंपरा की जड़ें राजा–महाराजाओं के जमाने से जुड़ी है।
रामनगर धमेडी स्टेट था, जहां राजा गुलाब सिंह, राजा जोरावर सिंह, राजा उदित नारायण सिंह , राजा अमर कृष्ण नारायण सिंह ,राजा विजय सिंह व रत्नाकर सिंह के समय में भी यहां दिन भर रंग खेलने की परम्परा रही।इन सबके न रहने के बाद रानी मृणालिनी सिंह के समय भी यही परम्परा कायम है। बीच में प्रशासनिक अधिकारियों ने बड़ा प्रयास किया कि ग्रामीण एरिया की भांति यहां भी दोपहर तक रंग चले लेकिन बात नहीं बनी और बदस्तूर राजाओं-महाराजाओं के जमाने से पूरे दिन रंग चलने की प्रथा चली आ रही है।
कस्बे के बुजुर्ग भोलानाथ त्रिपाठी,चंद्र प्रकाश,राम प्यारे आदि बताते हैं कि गरीब अमीर की खाई पाटने के लिए दिन भर रंग खेलने की परम्परा शुरू हुई। वह इसलिए कि कोई अमीर हो या गरीब ,सभी रंग-बिरंगे रंगों से भीगे कपड़े पहने रहने से एक जैसे दिखते हैं। अगर किसी गरीब के पास नए कपड़े नहीं रहते हैं तो वह भी रंग से भीगे कपड़े पहन सभी के साथ एक समान दिखता हैं।
सुबह से ही लखरौरा माेहल्ले से फाग का जत्था निकलता है। ढोलक, मंजीरा और पारंपरिक गीतों की स्वर लहरियों के बीच लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते हुए पूरे कस्बे में भ्रमण करते हैं। फाग यात्रा दिन में शुरू होकर विभिन्न माेहल्लों से गुजरती हुई शाम तक अमर सदन पहुंचती है। वहीं पर सामूहिक गायन और मिलन के साथ रंगोत्सव का समापन होता है।
खास बात यह है कि दिन भर रंग खेलने के बाद शाम को लोग स्नान कर एक दूसरे के घर होली मिलने निकलते हैं और एक-दूसरे के यहां जाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं। आपसी मेल-मिलाप और भाईचारे की यह परम्परा कस्बे की पहचान बन चुकी है। रामनगर स्टेट की राजमाता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की पुत्री व रामनगर स्टेट की राजमाता मृडालनी सिंह ने बताया कि हमारे पुरखों की परंपरा आज भी कायम है । राजा रत्नाकर सिंह की मृत्यु के बाद मैंने सभी कार्य अपनी जिम्मेदारी पर ले लिए हैं। जो हमारे पुरखों की परंपरा है, उसका पालन करना हमारी जिम्मेदारी है। वह मैं बखूबी निभा रही हूं।
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज कुमार चतुवेर्दी