बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की आदतें अपनानी चाहिए : डॉ. मुक्ता गर्ग
कानपुर, 31 मई (हि.स.)। पर्यावरण संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। बच्चों को जल संरक्षण, स्वच्छता और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर पर्यावरण सुरक्षा में सक्रिय योगदान देना चाहिए। यह बातें रविवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन विभाग की प्रभारी डॉ. मुक्ता गर्ग ने कहीं।
मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन विभाग में आयोजित छह दिवसीय ग्रीष्मकालीन शिविर का समापन पाैेधरोपण और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुआ। शिविर के दौरान छात्र-छात्राओं ने बच्चों को जल संरक्षण मॉडल, पहेलियों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से पानी के महत्व और उसके संरक्षण की जानकारी दी।
क्राॅफ्ट गतिविधियों में बच्चों को बर्ड फीडर और बर्ड वाटर बाउल बनाना सिखाया गया तथा वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। लघु नाटिका के माध्यम से रीसाइक्लिंग, कचरा पृथक्करण और विभिन्न रंगों के डस्टबिन के उपयोग की जानकारी दी गई। बच्चों ने प्लास्टिक की पुरानी बोतलों से पौधों के लिए पॉट तैयार किए और पौधरोपण में हिस्सा लिया।
शिविर में रेयांश, परी और श्रेयांश को “सक्रिय पर्यावरण योद्धा” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सभी प्रतिभागी बच्चों को पौधे और पर्यावरण संबंधी सामग्री भेंट की गई। कार्यक्रम में नर्सरी टीचर रेनू, डॉ. श्वेता राय तथा विभाग के पीएचडी, एमएससी और बीएससी के छात्र-छात्राओं का विशेष योगदान रहा। समापन अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. सीमा सोनकर ने आयोजन की सराहना करते हुए सभी को बधाई दी।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप