महिलाओं में बढ़ रही फेफड़ों के कैंसर की बीमारी : डा.वेद प्रकाश
लखनऊ, 31 जुलाई (हि.स.)। धूम्रपान एक बड़ा जोखिम कारक है, जो भारत में फेफड़ों के कैंसर के लगभग 85 फीसद मामलों के लिए ज़िम्मेदार है। वहीं महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर की दर बढ़ रही है, जिसका एक कारण पिछले कुछ दशकों में महिलाओं में धूम्रपान की बढ़ती दर है। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा.वेदप्रकाश ने दी।
डा. वेद प्रकाश ने शुक्रवार को केजीएमूय में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि कम-डोज़ वाले सीटी स्कैन से शुरुआती स्टेज में ही फेफड़ों के कैंसर का पता लगाया जा सकता है, जिससे ज़्यादा जोखिम वाले लोगों में इससे होने वाली मौतों को लगभग 20 फीसद तक कम किया जा सकता है। फेफड़ों के कैंसर के लगभग 10-15 प्रतिशत मामले उन लोगों में होते हैं जो धूम्रपान नहीं करते हैं।
डा. वेद प्रकाश ने बताया कि 'विश्व फेफड़ों का कैंसर दिवस' की शुरुआत फेफड़ों के कैंसर के प्रसार और इसके असर की ओर दुनिया का ध्यान खींचने के लिए की गई थी। इस दिन को पहली बार 2012 में 'फोरम ऑफ़ इंटरनेशनल रेस्पिरेटरी सोसाइटीज़' (FIRS)और 'इंटरनेशनल एसोसिएशन फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ लंग कैंसर' (IASLC) के सहयोग से मनाया गया था। तब से, यह हर साल 1 अगस्त को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण वैश्विक कार्यक्रम बन गया है।
फेफड़ों के कैंसर के लक्षण
लगातार खांसी
खांसी के साथ खून आना
सीने में दर्द
सांस लेने में तकलीफ
बिना किसी कारण वज़न कम होना
भूख न लगना
बार-बार इन्फेक्शन होना
हड्डियों में दर्द
फेफड़ों के कैंसर की जांच
डा. वेद प्रकाश ने बताया कि चेस्ट एक्स-रे, सीटी स्कैन, पेट स्कैन, व बायोप्सी व ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रियाओं के माध्यम से फेफड़ों के कैंसर की जांच की जा सकती है। बीमारी से बचाव और शुरुआती दौर में इसका पता लगाने के लिए जोखिम के कारणों को समझना बहुत ज़रूरी है। फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण, जो लगभग 85 फीसद मामलों के लिए ज़िम्मेदार है। सिगरेट के धुएं में कैंसर पैदा करने वाले तत्व (कार्सिनोजेन्स) होते हैं जो फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और कैंसर का कारण बनते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन