मातृभाषा में विज्ञान से होगा देश का बहुआयामी विकास : प्रो. अविनाश पाण्डेय

 




--बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय राष्ट्रीय हिन्दी विज्ञान सम्मेलन का शुभारम्भ, 490 शोध-पत्रों पर होगी चर्चा

झांसी, 20 मार्च (हि.स.)। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में तीन दिवसीय राष्ट्रीय हिन्दी विज्ञान सम्मेलन का शुक्रवार को शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत पुलिस अधिकारी अंजली द्वारा योग प्रस्तुति से हुई। अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

मुख्य अतिथि अविनाश चंद्र पांडे ने कहा कि विज्ञान की पढ़ाई मातृभाषाओं में करने से देश का बहुआयामी विकास संभव है और इससे डाटा सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान के तीन स्तर—अज्ञान, सीखना और अनुभव होते हैं। जगदीश चंद्र बोस का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अनुभव आधारित ज्ञान ही वास्तविक विज्ञान है। मातृभाषा में विज्ञान के प्रसार से नई संभावनाएं खुलेंगी और शोध कार्य अधिक प्रभावी होंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति मुकेश पाण्डेय ने कहा कि यह सम्मेलन ज्ञान -विज्ञान के क्षेत्र में नई क्रांति का सूत्रपात करेगा। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा, ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और राष्ट्रीय शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित किया।

विशिष्ट अतिथि शिव कुमार ने कहा कि भाषा मानव मस्तिष्क और मन दोनों को प्रभावित करती है। विज्ञान की अवधारणाओं को समझाने में भाषा की अहम भूमिका होती है, इसलिए भारतीय भाषाओं में विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है।

सम्मेलन का आयोजन विज्ञान भारती , बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, अल्ट्रासोनिक सोसाइटी ऑ$फ इंडिया एवं उत्तर प्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।

इस अवसर पर डॉ. कैलाश विश्वकर्मा को आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय विज्ञान संवर्धन सम्मान से नवाजा गया, जबकि डॉ. प्रतिभा मिश्रा सहित छह वैज्ञानिकों को ‘जयंत सहस्रबुद्धे विज्ञान विशारद सम्मान’ प्रदान किया गया।

सम्मेलन समन्वयक प्रो. डी.के. भट्ट ने बताया कि इस बार 490 शोध-पत्र प्राप्त हुए हैं और 23 तकनीकी सत्रों में विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। डॉ. जय प्रकाश शुक्ल ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में शोध स्मारिका और पत्रिका का विमोचन भी किया गया। योग विशेषज्ञों द्वारा योग प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र रहा। अंत में कानपुर प्रांत के महासचिव डॉ. सुनील मिश्र ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

--डॉ. कौशल त्रिपाठी को सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रस्तुति का सम्मान

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के डॉ. कौशल त्रिपाठी को जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रस्तुति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ‘डिजिटल युग में मीडिया, समाज और सार्वजनिक विमर्श’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी (17-18 मार्च) में उन्होंने ‘झांसी में चुनावी विमर्श को आकार देने में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका’ विषय पर शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार स्थानीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ‘डिजिटल गेटकीपर’ बनकर मतदाताओं की राय को प्रभावित कर रहे हैं। कुलपति मुकेश पाण्डेय के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के दल ने सम्मेलन में प्रभावशाली भागीदारी की।

संचालन डॉ. अनुपम व्यास और प्रतिज्ञा पाण्डेय ने किया, जबकि विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

विश्वविद्यालय की ओर से कुल 10 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। दल में डॉ. राघवेंद्र दीक्षित, डॉ. अभिषेक दीक्षित, डॉ. बृजेश परिहार सहित शोधार्थियों ने भी अपने विचार रखे। इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार ने हर्ष व्यक्त किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया