बुवि : चित्रों में सजेगी बुंदेलखण्ड की सांस्कृतिक विरासत
31वें दीक्षांत समारोह के तहत ‘बुंदेली वसुधा’ राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का शुभारंभ
झांसी, 24 जुलाई (हि.स.)। बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह के उपलक्ष्य में ललित कला संस्थान द्वारा आयोजित ‘बुंदेली वसुधा’ सात दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का शुक्रवार को दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुभारंभ हुआ। 24 से 30 जुलाई तक चलने वाली इस कार्यशाला में देशभर से चयनित 50 कलाकार बुंदेलखण्ड की लोक कला, संस्कृति, जनजीवन, पारंपरिक शिल्प, ऐतिहासिक धरोहरों और वास्तुकला को अपनी चित्रकृतियों के माध्यम से जीवंत रूप देंगे। आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, संवर्धन और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रस्तुतीकरण करना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर ने की। मुख्य अतिथि के रूप में उपकुलसचिव सुनील कुमार सेन तथा मुख्य वक्ता एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. पुनीत बिसारिया उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।
अध्यक्षीय संबोधन में राज बहादुर ने कहा कि ‘वसुधा’ का अर्थ धरती है और बुंदेलखण्ड की धरती अपनी समृद्ध लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक पहचान के कारण पूरे देश में विशेष स्थान रखती है। उन्होंने युवा कलाकारों से अपनी रचनात्मक क्षमता का बेहतर प्रदर्शन कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का आह्वान किया।
प्रो. पुनीत बिसारिया ने कहा कि बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और कलाकारों ने हमेशा अपनी प्रतिभा से संस्थान का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि संस्थान के कई पूर्व छात्र आज देश-विदेश में कला जगत में प्रतिष्ठित स्थान हासिल कर चुके हैं और उनकी रचनाएं समाज पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ रही हैं। वहीं, मुख्य अतिथि सुनील कुमार सेन ने कहा कि कला का विद्यार्थी सदैव नवाचार, शोध और सृजन की दिशा में अग्रसर रहता है तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।
कार्यशाला की समन्वयक डॉ. श्वेता पाण्डेय ने बताया कि सात दिनों तक कलाकार बुंदेलखण्ड की लोक संस्कृति, लोकजीवन, प्राकृतिक सौंदर्य, पारंपरिक शिल्प, ऐतिहासिक धरोहरों और वास्तुकला से जुड़े विषयों पर चित्रों का सृजन करेंगे। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के अंत में तैयार चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति द्वारा किया जाएगा।
वरिष्ठ कलाकार डॉ. सुनीता ने कहा कि बुंदेली कला की अपनी विशिष्ट पहचान है और यहां की लोक परंपराएं कलाकारों को निरंतर प्रेरणा देती हैं। कार्यक्रम का संचालन गजेंद्र सिंह ने किया तथा डॉ. अजय कुमार गुप्ता ने आभार व्यक्त किया। उद्घाटन समारोह में डॉ. रितु शर्मा, डॉ. दिलीप कुमार, डॉ. अंकिता शर्मा, डॉ. रानी शर्मा, डॉ. संतोष कुमार सहित शिक्षक, कलाकार, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यशाला के माध्यम से बुंदेलखण्ड की सांस्कृतिक अस्मिता को नई पीढ़ी से जोड़ने और राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया