मानदेय, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा को लेकर सड़क पर उतरेंगी आशा कार्यकर्ता

 


मानदेय, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा को लेकर 25 फरवरी को होगा देशव्यापी प्रदर्शन : मीरा सिंह

लखनऊ, 22 फरवरी(हि.स.)। देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी रीढ़ मानी जाने वाली आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं के सवाल पर अब संघर्ष ने राष्ट्रीय स्वर ले लिया है। भारतीय मजदूर संघ से जुड़े आशा कर्मचारी महासंघ एवं आशा संगिनी कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता 25 फरवरी को पूरे देश में 'विरोध दिवस' मनाने का ऐलान किया है। इस दिन सभी जिला मुख्यालयों पर धरना, प्रदर्शन, रैलियां और गेट मीटिंग आयोजित कर केंद्र और राज्य सरकारों को स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि अब उपेक्षा स्वीकार नहीं की जाएगी।

आशा संगिनी कर्मचारी संगठन उत्तर प्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष मीरा सिंह ने कहा कि दो दशकों से अधिक समय से मातृ-शिशु स्वास्थ्य,टीकाकरण, जनजागरूकता और आपात सेवाओं में 24 घंटे सक्रिय रहने वाली लाखों कार्यकर्ताओं को अब भी 'योजना कार्यकर्ता' का दर्जा देकर न्यूनतम मानदेय पर काम कराया जा रहा है। जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती गईं,लेकिन वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सेवा शर्तों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

उन्होंने बताया कि आंदोलन के तहत देशभर में कार्यकर्ता काले बैज पहनकर विरोध दर्ज कराएंगी और जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय श्रम मंत्री तथा संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन सौंपेंगी। संगठन का कहना है कि यदि इस बार भी ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक व निर्णायक रूप दिया जाएगा।आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं की मांग है कि उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और श्रम कानूनों को पूरी तरह लागू किया जाए। 2005 की आशा नियमावली में संशोधन कर सेवा शर्तें स्पष्ट व सुरक्षित की जाएं। भारतीय श्रम सम्मेलन (आईएलसी) को तत्काल बुलाकर त्रिपक्षीय तंत्र को सक्रिय किया जाए। ईएसआई और ईपीएफ के दायरे में शामिल कर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 के तहत पात्रता प्रदान की जाए। संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 के अनुरूप नियमितीकरण और समान अधिकार दिए जाएं। आयु सीमा संबंधी प्रतिबंध हटाकर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का लाभ सुनिश्चित किया जाए।सम्मान, सुरक्षा और अधिकार की लड़ाई प्रदेश अध्यक्ष मीरा सिंह ने कहा कि यह केवल वेतन का मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की लड़ाई है। 25 फरवरी का 'विरोध दिवस' देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियाद को मजबूत करने की दिशा में एक राष्ट्रीय संदेश साबित होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश