विजय बहादुर पाठक ने की लोक अदालत की तर्ज पर राजस्व जन अदालत शुरू करने की मांग
लखनऊ, 03 अगस्त (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने प्रदेश में लोक अदालत की तर्ज पर राजस्व जन अदालत शुरू करने की मांग की है। सोमवार को विधान परिषद में नियम 115 के तहत लोक महत्व के इस सुनिश्चित अविलम्बनीय विषय पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए विजय बहादुर पाठक ने कहा कि प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथनाथ के कुशल नेतृत्व में आमजन के हित में लिए जा रहे फैसलो के कारण राजस्व संबंधी मामलो में आशातीत सफलता मिल रही है। घरौनी का वितरण हो या भूमि विवाद संबंधित प्रकरण अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए समाधान निकाले जा रहे है। किन्तु नामांतरण, बटवारा, सीमांकन, कब्जा, बेदखली सर्वजनिक सम्पतियों पर अवैध ढंग से कब्जे आदि से संबंधित वाद बडी़ संख्या में लंम्बित हैं। इन मामलों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश भी है किन्तु उपजिलाधिकारी, तहसीलदार नायब तहसीलदारों पर अत्यधिक प्रशासनिक दायित्वों का भार होने के कारण वर्षों से लंबित वादों के निस्तारण की गति मंद है। जिस कारण इसका प्रतिकूल प्रभाव किसानों गरीबों पर पड़ रहा है। वे अनावश्यक रूप से परेशान हो रहे हैं। कई बार भूमि संबंधीत विवाद इस सीमा तक बढ जा रहे है कि वे कानून व्यवस्था तक के लिए चुनौती बन जाते है।
इसलिए प्रदेश में राजस्व न्यायालयों में लंम्बित वादों के समयबद्ध निस्तारण के लिए लोक अदालत की तर्ज पर “राजस्व जन अदालत” शुरू करने की ठोस कार्य योजना बनाये जाने की आवश्यकता है।
नियम- 59 के अन्तर्गत सदन में बोलते हुए विजय बहादुर पाठक ने कहा कि वाराणसी में स्थित प्राचीन व ऐतिहासिक बौद्ध स्थल सारनाथ को 25 जुलाई 2026 को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की विष्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान ’’ यूनेस्को विष्व धरोहर सूची’’ में शामिल किया गया है। सारनाथ बौद्ध परम्परा पवित्र स्थल के रूप में सार्वभौमिक मान्यता प्रादत्त है। यह सदन सारनाथ को यूनेस्को विष्व धरोहर सूची में शामिल होने पर गर्व करता है तथा इसके लिए लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी के प्रति कृतज्ञता पूर्वक धन्यवाद ज्ञापित करता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन