बीएचयू के डॉ. मनोज कुमार वर्मा की दोहरी उपलब्धि, वियतनाम में देंगे प्लेनरी व्याख्यान

 


— यूजीसी की टीचर्स एसोसिएटशिप के लिए भी हुआ चयन

वाराणसी, 06 अक्टूबर (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के समाजशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर (वरिष्ठ वेतनमान) डॉ. मनोज कुमार वर्मा ने शैक्षणिक और शोध के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्हें वियतनाम में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय शोध सम्मेलन में प्लेनरी स्पीकर के रूप में आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही उनका चयन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की टीचर्स एसोसिएटशिप के लिए भी हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय और समाजशास्त्र विभाग में प्रसन्नता का माहौल है। मंगलवार को यह जानकारी बीएचयू जनसम्पर्क अधिकारी प्रो. राजेश सिंह ने दी । उन्होंने बताया कि डॉ. वर्मा एक से चार नवंबर, 2026 तक वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी में आयोजित होने वाले छठे इंडो ग्लोबल मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च कॉन्फ्रेंस 2026 में मुख्य वक्ता के रूप में व्याख्यान देंगे। सम्मेलन का आयोजन इंटरनेशनल बेनेवोलेंट रिसर्च फाउंडेशन , कोलकाता की ओर से विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। सम्मेलन में डॉ. वर्मा “डिजिटल इनइक्विलिटी एंड एजुकेशनल अपार्चुनिटीज अमंग यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स: एक्सामिनिंग डिजिटल एक्सेस, यूसेज एंड लर्निंग आउटकम्स” विषय पर अपना प्लेनरी व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। उनका शोध-पत्र समीक्षा प्रक्रिया के बाद सम्मेलन के लिए स्वीकार किया गया है। शोध में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के बीच डिजिटल संसाधनों तक पहुंच, तकनीक के उपयोग और उसके शैक्षणिक परिणामों में मौजूद असमानताओं पर चर्चा की गई है। डिजिटल शिक्षा के बढ़ते महत्व के बीच यह विषय उच्च शिक्षा में समान अवसर और समावेशन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यूजीसी की प्रतिष्ठित एसोसिएटशिप के लिए चयन डॉ. वर्मा का चयन भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआइएएस ), शिमला में संचालित यूजीसी के अंतर-विश्वविद्यालय मानवीय एवं सामाजिक विज्ञान केंद्र की प्रतिष्ठित टीचर्स एसोसिएटशिप के लिए भी किया गया है। यह योजना चयनित विश्वविद्यालय शिक्षकों को मानविकी और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में उच्च स्तरीय शोध तथा अकादमिक विमर्श का अवसर प्रदान करती है। इस एसोसिएटशिप के अंतर्गत डॉ. वर्मा वर्ष 2027, 2028 और 2029 के दौरान निर्धारित अवधि में शिमला स्थित संस्थान में रहकर अपना शोध कार्य करेंगे। इस दौरान उन्हें संस्थान के समृद्ध पुस्तकालय का उपयोग करने और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। साथ ही, नियमानुसार यात्रा और रखरखाव संबंधी भत्ते की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

सामाजिक मुद्दों पर शोध में रुचि

डॉ. मनोज कुमार वर्मा समाजशास्त्र के अध्यापन और शोध के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके प्रमुख शोध विषयों में सामाजिक बहिष्करण, हाशियाकरण, ग्रामीण विकास, शोध पद्धति, डिजिटल असमानता और सामाजिक समावेशन शामिल हैं। वे विद्यार्थियों और शोधार्थियों के मार्गदर्शन के साथ विभिन्न अकादमिक गतिविधियों में भी योगदान दे रहे हैं।उनकी इन दोनों उपलब्धियों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और शोध कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने डॉ. वर्मा को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी