मानव कल्याण की वैश्विक मार्गदर्शिका है गीता: प्रो. आर एन त्रिपाठी

 


--गीता ही समाज,राष्ट्र-निर्माण का है सूत्र: श्रीराम कृष्ण गोस्वामी

--प्रयाग का महात्म्य, राष्ट्र-निर्माण और मानवाधिकार: अशोक पाठक

--तकनीकी शिक्षा और मानवीय मूल्यों का समन्वय आवश्यक: प्रो. रवि प्रकाश तिवारी

प्रयागराज, 12 जून (हि.स)। मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) प्रयागराज में ‘भगवद्गीता ज्ञान विज्ञान महायज्ञ’ संगोष्ठी का भव्य आयोजन शुक्रवार को किया गया। पुरुषोत्तम मास की पवित्र बेला में आयोजित इस वैचारिक अनुष्ठान में देश के ख्यातिलब्ध विद्वानों, प्रशासनिक अधिकारियों, समाजसेवियों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों, शिक्षा और राष्ट्र-निर्माण में आध्यात्मिक चेतना की व्यावहारिक भूमिका को रेखांकित करना था।

मुख्य अतिथि काशी हिन्दू विवि (बीएचयू) के प्रो. आर एन त्रिपाठी ने शिक्षा और अध्यात्म के व्यावहारिक संतुलन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गीता का मूल संदेश सम्पूर्ण मानव कल्याण और लोक-संग्रह पर आधारित है। आज की आपाधापी भरी जिंदगी और मानसिक तनाव के दौर में गीता के श्लोक मनुष्य को आंतरिक शांति और समाज के प्रति उसके दायित्वों का बोध कराते हैं।

मुख्य वक्ता दिल्ली से आये हुए श्रीराम कृष्ण गोस्वामी ने भगवद्गीता के संदेशों को 21वीं सदी के व्यावहारिक जीवन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि श्रेष्ठ समाज और अखंड राष्ट्र निर्माण का व्यावहारिक विज्ञान है। उन्होंने नागरिक सुरक्षा, लोक प्रशासन और मानवाधिकारों पर विशेष बल देते हुए कहा कि गीता का ‘आत्मवत् सर्वभूतेषु’ (सभी जीवों को अपने समान देखना) का सिद्धांत ही वैश्विक मानवाधिकारों का असली मूल मंत्र है। जब देश का प्रत्येक नागरिक ‘निष्काम कर्मयोग’ को अपनाएगा, तभी एक सशक्त और चरित्रवान राष्ट्र का उदय होगा।

विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय सनातन एकता मिशन के अध्यक्ष पं अशोक कुमार पाठक ने अध्यात्म को राष्ट्र चेतना से जोड़ा। उन्होंने प्रयागराज की पावन भूमि के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि जहां त्रिवेणी का संगम वैचारिक शुद्धता देता है, वहीं गीता का ज्ञान हमें कर्तव्य का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि मानव अधिकारों की रक्षा करना ही वास्तव में लोक शासन और प्रशासन का असली धर्म है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एमएनएनआईटी के निदेशक प्रो. रवि प्रकाश तिवारी ने कहा कि आज के तकनीकी युग में युवाओं को केवल कुशल पेशेवर ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और मूल्य आधारित नागरिक बनना आवश्यक है। एमएनएनआईटी इस दिशा में तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के लिए सदैव तत्पर है।

कार्यक्रम की रूपरेखा और विषय प्रवर्तन करते हुए योजना प्रमुख व शोध छात्र सच्चिदानंद त्रिपाठी ने युवाओं के दृष्टिकोण से गीता की वैज्ञानिक प्रासंगिकता को रखा। अंत में सम्पर्क प्रमुख राकेश कुमार तिवारी (सिविल डिफेंस डिपार्टमेंट) ने मुख्य वक्ता गोस्वामी सहित सभी अतिथियों, सहयोगी संस्थाओं (भारतीय चरित्र निर्माण संस्थान, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, सिविल डिफेंस डिपार्टमेंट, प्रयागराज और आईआईएचएमएफ तथा सभागार में उपस्थित प्रबुद्ध जन, शोधार्थियों व छात्र-छात्राओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र