रंग-गुलाल खेलने के भी हैं बड़े फायदे : सतीश राय

 


--कलर थेरेपी में शरीर पर रंग लगाकर होता है रोगों का उपचार

--प्रमुख चिकित्सा पद्धतियों में है रंग चिकित्सा

प्रयागराज, 02 मार्च (हि.स)। हमारे त्योहार शरीर को निरोग रखने में सहायक होते हैं। होली पर सबको रंग-गुलाल जरूर खेलना चाहिए। इसके कई फायदे भी हैं। कलर थेरेपी में शरीर पर रंग लगाकर रोगों का उपचार किया जाता है।

यह बातें जाने-माने स्पर्श चिकित्सक सतीश राय ने होली के पूर्व हिन्दुस्थान समाचार से वार्ता करते हुए कहीं। उन्होंने रंगों पर चर्चा करते हुए कहा कि लाल रंग से कफ रोग ठीक होता है, इससे मानसिक रोगों व सिर दर्द में लाभ मिलता है। नारंगी रंग से मांसपेशियों को मजबूती, कफ, सर्दी-जुकाम में लाभ मिलता है। पीला रंग पाचन संबंधित समस्याएं दूर करता है। हरा रंग से मन प्रसन्न होगा। आसमानी रंग शरीर में शीतलता प्रदान करता है। नीला रंग शांति प्रदान करने के साथ गर्मी के सभी रोगों को नष्ट करता है। बैगनी रंग से खून की कमी दूर होती है।

उन्होंने वार्ता के दौरान बताया कि क्रोमो-थेरेपी मिस्र देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। इसे कलर थेरेपी अर्थात रंग चिकित्सा भी कहते हैं। यूनान में भी रंगों का उपयोग इलाज के लिए सदियों से किया जा रहा है।

--सूर्य की किरणों में भी हैं सात रंगसतीश राय ने कहा भारत में प्रमुख चिकित्सा पद्धतियों में रंग चिकित्सा का भी नाम है। हजारों वर्ष पूर्व महर्षि चरक भी सूर्य की रोशनी से कई बीमारियों का इलाज करते थे। सूर्य की किरणों में सात रंग हैं। बारिश के मौसम में जब बिजली चमकती है उस समय इंद्रधनुष में इन सात रंगों को अपनी नंगी आंखों से देख सकते हैं। हमारे शरीर में भी प्रमुख सात चक्र (सहस्रार, आज्ञा, कंठ, हृदय, मणिपुर, स्वाधिष्ठान एवं मूलाधार चक्र) होते हैं और इन चक्रों के रंग भी क्रमशः बैगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल होते हैं। चक्रों का रंग भी सूर्य के किरणों से मेल खाता है, इसलिए सूरज की रोशनी हमें एनर्जी देते हैं।

--पीले रंग से ठीक होती है पेट की बीमारियांसतीश राय ने कहा कि रंग चिकित्सा में यह माना जाता है कि शरीर के जिस चक्र में रंग की कमी हो जाती है, उससे सम्बंधित अंगों में रोग उत्पन्न होता है। यदि किसी तरह उस अंग सम्बंधित रंग की कमी को दूर कर दिया जाए तो रोग भी ठीक हो जाएगा। रंग चिकित्सा इसी पर आधारित है। जैसे किसी के पेट में प्रॉब्लम है तो उसका मणिपुर चक्र कमजोर है और उसके शरीर में पीले रंग की कमी है। उस रंग से सम्बंधित फल सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें, पीले रंग के कपड़े पहनने से लाभ होगा। पीला रंग हारमोंस में वृद्धि भी करता है, यह पाचन क्रिया को भी ठीक करता है। इससे पेट से सम्बंधित सभी तरह के रोगों में लाभ होता है ।

--कलर थेरेपी का जाने अनजाने जीवन में होता है रोज उपयोग सतीश राय ने कहा कि शरीर में जिन रंगों की कमी होती है व्यक्ति उस रंग की तरफ ज्यादा आकर्षित होता है। रोजमर्रा की जिंदगी में जाने अनजाने हम अक्सर कलर थैरेपी का इस्तेमाल करते हैं। जैसे अलग-अलग रंगों के फल सब्जी खा रहे हैं, कपड़े पहन रहे हैं। उससे हमें अलग-अलग तरह की एनर्जी रोज मिलती रहती है।

--शरीर पर रंग लगने के भी हैं कई फायदेसतीश राय ने आगे कहा शरीर पर रंग लगने के कई फायदे हैं। इससे शरीर और मन दोनों स्वस्थ एवं शांत होते हैं। रंगों के इस्तेमाल से डिप्रेशन और तनाव जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। हरा रंग डिप्रेशन में लाभ देता है। रंग हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रंगीन कपड़े पहनने के भी कई लाभ हैं।

बृहस्पतिवार को पीले रंग के कपड़े पहनने से जाने अनजाने अपने बृहस्पति ग्रह को मजबूत बनाते हैं। बुद्ध को हरा रंग, सोमवार और शुक्र को सफेद रंग, मंगल को लाल रंग के कपड़े से लाभ मिलता है। अक्सर लोग विशेष मौकों पर कोई खास रंग के कपड़े पहनना पसंद करते हैं। आप भी अपने लकी नंबर रंग के कपड़ों की पहचान कर अपने भाग्य को मजबूत कर सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र