स्वर के जादूगर अनूप जलोटा ने राम मंदिर प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह में बिखेरा राग का जलवा
अच्युतम केशवम् कृष्ण दामोदरम की मनमोहक प्रस्तुति दी
-ठुमकि चलत रामचंद्र, बाजत पैजनिया..... के साथ हुआ समापन
अयोध्या, 01 जनवरी (हि.स.)।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा अंगद टीला मैदान पर आयोजित श्रीराम लला के द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह के चौथे दिन गुरुवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भजन सम्राट अनूप जलोटा ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा| मंच पर श्रीराम लला के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के बाद चिरपरिचित गीत ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन से कार्यक्रम की शुरुआत की|
अच्युतम केशवम् कृष्ण दामोदरम् राम नारायणम् जानकी वल्लभम्...कौन कहता है भगवान आते नहीं, मीरा के जैसे बुलाते नहीं..गीत सुना कर श्रोताओं को तलियाँ बजाने पर मजबूर किया| इसके बाद मेरे मन में राम तन में राम रोम रोम में राम रे, राम सुमिर ले ध्यान लगा ले छोड़ जगत के काम रे भाजनों के बीच अनूप जलोटा ने पहले वायलिन संगतकर्ता महेश राव के साथ स र ग म की संगत की औऱ उत्कृष्ट वादन का परिचय दिया|
इसके बाद श्याम तेरी बंशी, कन्हैया तेरी बंशी पुकारे राधा नाम,..... प्रस्तुत कर श्रोताओं को साथ गाने पर मजबूर किया| गायकी के बीच अनूप ने लम्बा अलाप लेकर अपनी चिरपरिचित स्वर साधना प्रस्तुत कर सबको तलियाँ बजाने पर मजबूर किया| इसी क्रम में कभी कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े, जाना था गंगा पार प्रभू केवट की नाव चढ़े की प्रस्तुति दी| भजन में श्रीराम की विभिन्न लीलाओं, केवट का चरण पखारना, अहिल्या उद्धार, उतराई देने की लीला का भी वर्णन किया| इसी क्रम जग में सुंदर हैं दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम, बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम श्याम..| तबला वादक की कुशलता प्रमाणित करने को वादक अमित चौधरी के साथ जुगलबंदी कर तलियाँ बटोरी|
अमीशा जलोटा ने पायो जी मैने राम रतन धन पायो की प्रस्तुति दी| अंत में अनूप जलोटा ने रामलला पर ठुमकि चलत रामचंद्र, बाजत पैजनिया..... की प्रस्तुति देते हुए तलियाँ बटोरी| भजन गायकी में तबले पर अमित चौधरी, वायलीन पर महेश राव, गिटार पर हिमांशु तिवारी व गायन में अमीशा जलोटा ने संगत दी| कार्यक्रम समापन पर सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया| कार्यक्रम मंच पर ट्रस्ट महासचिव चम्पतराय, राजेंद्र सिंह पंकज, धनंजय पाठक, डॉ चंद्र गोपाल पाण्डेय, विनोद श्रीवास्तव, कप्तान केके तिवारी, भोलेन्द्र आदि उपस्थित रहे|
अच्युतम केशवम् कृष्ण दामोदरम् राम नारायणम् जानकी वल्लभम्...
-स्वर के जादूगर अनूप जलोटा ने बिखेरा राग का जलवा
-ठुमकि चलत रामचंद्र, बाजत पैजनिया..... के साथ हुआ समापन
अयोध्या, 1 जनवरी | श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा अंगद टीला मैदान पर आयोजित श्रीराम लला के द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह के चौथे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भजन सम्राट अनूप जलोटा ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा| मंच पर श्रीराम लला के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के बाद चिरपरिचित गीत ऐसी लगी लगन मीरा हो गई मगन से कार्यक्रम की शुरुआत की|
अच्युतम केशवम् कृष्ण दामोदरम् राम नारायणम् जानकी वल्लभम्...कौन कहता है भगवान आते नहीं, मीरा के जैसे बुलाते नहीं.. गीत सुना कर श्रोताओं को तलियाँ बजाने पर मजबूर किया| इसके बाद मेरे मन में राम तन में राम रोम रोम में राम रे, राम सुमिर ले ध्यान लगा ले छोड़ जगत के काम रे भाजनों के बीच अनूप जलोटा ने पहले वायलिन संगतकर्ता महेश राव के साथ स र ग म की संगत की औऱ उत्कृष्ट वादन का परिचय दिया|
इसके बाद श्याम तेरी बंशी, कन्हैया तेरी बंशी पुकारे राधा नाम,..... प्रस्तुत कर श्रोताओं को साथ गाने पर मजबूर किया| गायकी के बीच अनूप ने लम्बा अलाप लेकर अपनी चिरपरिचित स्वर साधना प्रस्तुत कर सबको तलियाँ बजाने पर मजबूर किया| इसी क्रम में कभी कभी भगवान को भी भक्तो से काम पड़े, जाना था गंगा पार प्रभू केवट की नाव चढ़े की प्रस्तुति दी| भजन में श्रीराम की विभिन्न लीलाओ, केवट का चरण पखारना, अहिल्या उद्धार, उतराई देने की लीला का भी वर्णन किया| इसी क्रम जग में सुंदर हैं दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम, बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम श्याम..| तबला वादक की कुशलता प्रमाणित करने को वादक अमित चौधरी के साथ जुगलबंदी कर तलियाँ बटोरी|
अमीशा जलोटा ने पायो जी मैने राम रतन धन पायो की प्रस्तुति दी| अंत में अनूप जलोटा ने रामलला पर ठुमकि चलत रामचंद्र, बाजत पैजनिया..... की प्रस्तुति देते हुए तलियाँ बटोरी| भजन गायकी में तबले पर अमित चौधरी, वायलीन पर महेश राव, गिटार पर हिमांशु तिवारी व गायन में अमीशा जलोटा ने संगत दी| कार्यक्रम समापन पर सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया| कार्यक्रम मंच पर ट्रस्ट महासचिव चम्पतराय, राजेंद्र सिंह पंकज, धनंजय पाठक, डॉ चंद्र गोपाल पाण्डेय, विनोद श्रीवास्तव, कप्तान केके तिवारी, भोलेन्द्र| उपस्थित रहे|
हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय