राम मंदिर दान विवाद पर सिंधी समाज ने बनाई दूरी, कहा-दान का हिसाब मांगना परंपरा नहीं
अयोध्या, 12 जुलाई (हि.स.)। राम मंदिर को दिए गए दान को लेकर उठे विवाद के बीच सिंधी समाज दो गुटों में बंटता नजर आ रहा है। मुंबई के सिंधी समाज के नेता राजू मनवानी की ओर से राम मंदिर को दान में दी गई 200 चांदी की ईंटों पर सवाल उठाने के बाद अयोध्या के सिंधी समाज ने उनके बयान से सार्वजनिक रूप से दूरी बना ली है।
रामनगर स्थित मंदिर में रविवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान सिंधी समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि सिंधी समाज सेवा, समर्पण और सनातन परंपराओं में विश्वास रखता है। श्रद्धा से किए गए दान का हिसाब मांगना समाज की परंपरा नहीं है।
वक्ताओं ने कहा कि सिंधी समाज स्वयं को प्रभु श्रीराम का वंशज और सनातन धर्म का समर्पित अनुयायी मानता है तथा राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक समाज ने पूरी निष्ठा के साथ योगदान दिया है।
सिंधी समाज के संदीप ने कहा कि आस्था से किए गए दान को विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक महत्वाकांक्षा और झूठी लोकप्रियता के लिए इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से उछाल रहे हैं।
नरेश क्षेत्रपाल ने कहा कि वर्ष 1947 में विस्थापन के बाद अयोध्या में बसे सिंधी समाज ने अपने निवास क्षेत्र का नाम रामनगर रखा था। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं ने योगदान दिया था और सिंधी समाज भी उसमें सहभागी रहा।
वक्ताओं ने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री द्वारा गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए था। यदि दान या चढ़ावे में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो एसआईटी की जांच के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और सख्त सजा दी जानी चाहिए।
इस मौके पर नरेश क्षेत्रपाल, सुमित मखेजा सहित अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राजू मनवानी का बयान उनका व्यक्तिगत मत है और उससे अयोध्या का सिंधी समाज स्वयं को अलग करता है। उन्होंने कहा कि समाज देने में विश्वास रखता है, हिसाब मांगने में नहीं और विपक्ष के आरोपों से सत्य नहीं बदलता।
हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय