अयोध्या और तमिलनाडु रामायण कालीन विरासत से हैं जुड़े : डाॅ. बिजेंद्र सिंह

 


-अवध विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं व्याख्यान के साथ मनाया गया तमिलनाडु दिवस

अयोध्या, 31 अक्टूबर (हि.स.)। तमिलनाडु दिवस के उपलक्ष्य में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में शनिवार को श्रीराम शोध पीठ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. बिजेंद्र सिंह एवं मुख्य अतिथि कांची मठ, अयोध्या के रामचन्द्र आचार्य ने प्रभु श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

कार्यक्रम में वैभवी तिवारी एवं जूही सिंह ने तमिलनाडु की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किया। वहीं शताक्षी, निशा, माही एवं दीविता ने भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों ने तमिलनाडु की पारंपरिक वेशभूषा पर आधारित फैशन शो प्रस्तुत किया। तमिलनाडु की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए एक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया।

इस अवसर पर कुलपति डाॅ. बिजेंद्र सिंह ने छात्र-छात्राओं की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि अयोध्या और तमिलनाडु के बीच संबंध केवल भौगोलिक या सांस्कृतिक नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें हमारी प्राचीन सभ्यता और रामायणकालीन विरासत से जुड़ी हैं। तमिलनाडु की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं भक्ति परंपरा ने भारतीय संस्कृति को विशिष्ट पहचान प्रदान की है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और रामेश्वरम की परंपरा उत्तर एवं दक्षिण भारत को एक आध्यात्मिक सूत्र में जोड़ती है। अयोध्या और तमिलनाडु के बीच रामायण, रामभक्ति, मंदिर परंपरा, संगीत एवं साहित्य के माध्यम से सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध स्थापित रहे हैं। कुलपति ने कहा कि तमिलनाडु दिवस हमें भारत की विविधता में एकता की भावना को समझने और उसे मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करता है। हमें एक-दूसरे की भाषाओं, परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय एकात्मता को और सशक्त बनाना चाहिए।

मुख्य अतिथि कांची मठ, अयोध्या के रामचन्द्र आचार्य ने कहा कि अयोध्या और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। भगवान श्रीराम की परंपरा दोनों क्षेत्रों को एक साझा सांस्कृतिक सूत्र में जोड़ती है। तमिलनाडु की समृद्ध साहित्यिक, धार्मिक एवं भक्ति परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु दिवस विविधता में एकता और राष्ट्रीय सांस्कृतिक समन्वय की भावना को मजबूत करने का अवसर है।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्रम भेंटकर किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक के संयोजन में किया गया। संचालन छात्र अभय प्रताप सिंह एवं छात्रा जूही सिंह ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय