समाज की मूलभूत समस्याओं की गहरी समझ रखते थे डॉ. राममनोहर लोहिया : डॉ. बिजेंद्र सिंह

 


डॉ. राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर श्रीराम शोध पीठ में विचार गोष्ठी आयोजित

अयोध्या, 12 अक्टूबर (हि.स.)। डॉ. राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर सोमवार को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रीराम शोध पीठ सभागार में “डॉ. लोहिया का आर्थिक-सामाजिक चिंतन” विषय पर विचार गोष्ठी में कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने डॉ. लोहिया के विचारों को रेखांकित करते हुए कहा कि डॉ. लोहिया केवल एक राजनेता नहीं थे वे समाज की मूलभूत समस्याओं की गहरी समझ रखने वाले दूरदर्शी अर्थशास्त्री और दार्शनिक थे। उनका ‘सप्तक्रांति’ का दर्शन और ‘चौखंभा राज’ की अवधारणा आज भी नीति-निर्माताओं के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। लोहिया जी का स्पष्ट मानना था कि जब तक आर्थिक नीतियों के केंद्र में अंतिम पंक्ति का व्यक्ति, किसान और श्रमिक नहीं होगा, तब तक सच्चे अर्थों में राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है। आज जब विश्व असमानता, तकनीकी विस्थापन और जलवायु संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब लोहिया जी का ‘लघु तकनीक’ और विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था का मॉडल अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। कुलपति ने कहा कि लोहिया ने भारतीय संस्कृति को समावेशित किया भारतीय राजनीति में चमकते सितारे की तरह लोहिया ने भारत की प्रगति में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने का संदेश दिया है।

समन्वयक प्रो. आशुतोष सिन्हा ने बताया कि लोहिया के दर्शन में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग के लिए कुटीर व मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने की लोहियावादी नीति आज के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'लोकल फॉर वोकल' की संकल्पना का आधार है।महंगाई और बाजार की अनियंत्रित शक्तियों से आम नागरिक को बचाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और लागत आधारित मूल्य निर्धारण का उनका सिद्धांत आज भी कृषक कल्याण के विमर्श के केंद्र में है। कार्यक्रम में प्रो. सुरेन्द्र मिश्र ने भी सम्बोधित किया। संगोष्ठी का संचालन प्रो. शैलेंद्र कुमार ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय