आत्मनिर्भरता तब होगी जब हमारी अभियांत्रिकी मजबूत होगी: प्रो. राजीव त्रिपाठी

 


--वूमेन इन साइंस का अर्थ केवल लैब में काम करना नहीं: प्रो. गंगा राम मिश्र

--भौतिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग में संगोष्ठी का आयोजन

अयोध्या, 01 मार्च (हि.स.)। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के भौतिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में कुलपति कर्नल डॉ. बिजेन्द्र सिंह के निर्देशन में इस वर्ष की थीम वूमेन इन साइंस कैटालाइजिंग विकसित भारत पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अंतर्गत छात्र-छात्राओं के लिए प्रेजेंटेशन, पोस्टर, मॉडल, क्विज एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के पूर्व निदेशक एवं राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल के पूर्व कुलपति प्रो. राजीव त्रिपाठी ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हमें अब केवल 'प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता' नहीं, बल्कि 'अभियांत्रिकी का केंद्र' बनना होगा। हमारी आत्मनिर्भरता तब होगी जब हमारी अभियांत्रिकी मजबूत होगी और तभी हम स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित कर पाएंगे। नवाचार से नई समस्याओं (जैसे जलवायु परिवर्तन) के लिए नए इंजीनियरिंग समाधानों की आवश्यकता है।

विशिष्ट अतिथि वीर बहादुर पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय के प्रो. बृज बिहारी तिवारी ने सर सीवी रमन के जीवन एवं रमन स्पेक्ट्रा की वैज्ञानिक उपयोगिता को सरल शब्दों में समझाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. एसएस मिश्र ने राष्ट्र निर्माण में विज्ञान की भूमिका पर विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. गंगाराम मिश्र ने स्वागत करते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि वूमेन इन साइंस का अर्थ केवल लैब में काम करना नहीं है, बल्कि यह समानता, साहस और आधुनिकता का प्रतीक है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की आधी आबादी के पास वैज्ञानिक संसाधनों और अवसरों तक समान पहुंच होगी। भारतीय महिला वैज्ञानिक अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं, वे जटिल मिशनों का नेतृत्व कर रही हैं।

प्रो. के के वर्मा द्वारा कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की तथा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की पृष्ठभूमि और इस वर्ष की थीम का सारगर्भित विवेचन किया गया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक ने कार्यक्रम की थीम पर प्रेजेन्टेशन के माध्यम से विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. गीतिका श्रीवास्तव के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय