फसल अवशेष जलाने से बचें, कृषि यंत्रों की छूट का उठाएं लाभ : डॉ. खलील खान
कानपुर, 14 सितंबर (हि.स.)। फसल अवशेष जलाने से मानव स्वास्थ्य, मिट्टी और पर्यावरण पर होने वाले दुष्प्रभावों से बचने के लिए किसानों को इसके उचित प्रबंधन के तरीके अपनाने चाहिए। फसल अवशेषों से विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार करने के साथ मशरूम की गुणवत्तापूर्ण खेती भी की जा सकती है। यह जानकारी सोमवार को कृषि वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण के शुभारंभ के दौरान दी।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर में फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ। प्रशिक्षण में किसानों को फसल अवशेषों के प्रबंधन के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई।
डॉ. खलील खान ने बताया कि उत्तर प्रदेश और भारत सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए विभिन्न कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन यंत्रों की खरीद पर किसानों को निर्धारित छूट भी दी जाती है। किसानों को इन सुविधाओं का लाभ उठाकर फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया। किसानों को अवशेषों से उपयोगी उत्पाद तैयार करने तथा मशरूम की गुणवत्तापूर्ण खेती की तकनीक की जानकारी भी दी गई।
प्रशिक्षण में शुभम यादव, दिव्यांश, श्री भगवान पाल सहित 25 से अधिक किसान मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप