वेदों से ही काव्य के बीज तत्व प्राप्त होते हैं: प्रो. जनार्दन पाण्डेय
प्रयागराज, 24 मार्च (हि.स)। संस्कृत, पालि, प्राकृत एवं प्राच्यभाषा विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ऋषि व्याख्यानमाला के अन्तर्गत केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के गंगानाथ झा परिसर, प्रयागराज में साहित्य विभाग में आचार्य तथा अध्यक्ष के रूप में प्राे. जनार्दन पाण्डेय ‘मणि’ का ’आधुनिक संस्कृत काव्यशेवधि रिति’ विषय पर मंगलवार को व्याख्यान हुआ।
इविवि की पीआरओ प्रो. जया कपूर ने बताया कि प्रो. जनार्दन पाण्डेय संस्कृत वांग्मय के काव्य तथा काव्यशास्त्र के श्रेष्ठ विद्वान् हैं। उन्होंने व्याख्यान में बताया कि काव्य के बीजतत्व वेदों से ही प्राप्त होते हैं। काव्य तथा काव्यशास्त्र का स्वरूप निरुपण करते हुए गीति काव्य का विस्तृत विवेचन किया। इसके साथ ही उन्होंने आधुनिक संस्कृत के आचार्य रेवा प्रसाद द्विवेदी, आचार्य बच्चूलाल अवस्थी, आचार्य श्रीनिवास रथ, आचार्य राधावल्लभ त्रिपाठी, आचार्य अभिराज राजेंद्र मिश्र, आचार्य रमाकान्त शुक्ल,आचार्य पुष्पा दीक्षित आदि के गीति काव्यों की सोद्धरण समीक्षा करते हुए गीत काव्य के महत्त्व को परिपुष्ट किया तथा ‘गुरुगोरखानां का कथा’ नामक अपनी एक लोकप्रिय व्यंग्य प्रधान कविता का सस्वर पाठ भी किया।
पीआरओ ने बताया कि कार्यक्रम के प्रारम्भ में वैदिक मंगलाचरण रामकुमार पाण्डेय और उमाकान्त गौतम, लौकिक मंगलाचरण शिवरूप दीक्षित, स्वागत गीत पलक तिवारी, वाचिक स्वागत दीक्षा पाण्डेय, धन्यवाद ज्ञापन दिव्याश्री त्रिपाठी, शान्ति पाठ रामकुमार पाण्डेय शोधार्थियों ने किया। कार्यक्रम का संचालन शोधछात्र हर्षवर्धन पाण्डेय ने किया।
इस अवसर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के आचार्यगण प्रो.अनिल प्रताप गिरि, डॉ. निरूपमा त्रिपाठी, डॉ.विनोद कुमार, डा. मीनाक्षी जोशी, डॉ. तेज प्रकाश, डॉ. सन्त प्रकाश तिवारी, डॉ. प्राचेतस, डॉ. आशीष कुमार त्रिपाठी, डॉ. भूपेंद्र बालखंडे, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. रेनू कोछड़ शर्मा, डॉ. कल्पना कुमारी, डॉ. ललित कुमार, डा.रश्मि यादव, डॉ. रजनी गोस्वामी, डॉ. प्रतिभा आर्या आदि प्राध्यापकगण एवं भारी संख्या में शोध छात्र-छात्राएं एवं विभाग के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र