डॉ. भीमराव आंबेडकर की अस्थियों को निर्धारित स्थल से हटाने का प्रयास बर्दाश्त नहीं होगा : डॉ. जे.आर. बौद्ध

 


कानपुर, 11 जून (हि.स.)। डॉ. भीमराव आंबेडकर की अस्थियों को उनके निर्धारित स्थल से अन्यत्र स्थानांतरित करने का कोई भी प्रयास करोड़ों अनुयायियों की भावनाओं को आहत करेगा और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करेगा। बाबा साहेब की स्मृतियों और उनसे जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह बातें गुरुवार को भारतीय बौद्धिस्ट बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर महासभा के प्रदेश संयोजक एवं कानपुर प्रभारी डॉ. जे.आर. बौद्ध ने कहीं।

डॉ. बौद्ध ने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की अनुपम धरोहर स्वरूप अस्थियां 17 सितंबर 1990 को “भारतरत्न बौद्धिस्ट बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर महासभा” को सौंपी गई थीं। महासभा द्वारा उन्हें सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखते हुए बौद्ध विहार परिसर लखनऊ में स्थापित किया गया, जहां वर्षों से सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि महासभा के परिसर में स्थापित अस्थि कलश, प्रतिमाएं और स्मृति स्थल केवल एक संस्था की संपत्ति नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और राष्ट्रीय विरासत का हिस्सा हैं। ऐसे में उन्हें किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने या वहां की संरचनाओं को प्रभावित करने का प्रयास अनुचित और जनभावनाओं के विपरीत होगा।

डॉ. बौद्ध ने कहा कि देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने समय-समय पर इस स्थल पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की है। इसलिए इस ऐतिहासिक धरोहर को यथास्थान सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की अस्थियों, स्मृति स्थल तथा बौद्ध विहार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और किसी भी प्रकार के स्थानांतरण या बदलाव की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि समाज के लोग बाबा साहेब की विरासत के संरक्षण के लिए एकजुट हैं और उनकी स्मृतियों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप