भारत अध्यात्म के साथ विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी निरंतर आगे बढ़ रहा : प्रो. संजीत गुप्ता
तकनीक और शिक्षा तभी सार्थक हैं, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे: प्रो. आरके सिंह
जौनपुर, 25 सितंबर (हि.स.)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा एवं नवभारत की वैचारिक आधारभूमि विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।
मुख्य अतिथि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के पूर्व कुलपति प्रो. संजीत गुप्ता ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्ञान, दर्शन, विज्ञान और लोककल्याण को एक सूत्र में पिरोया गया है। यह परंपरा केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने विश्व को ज्ञान और मानव कल्याण का मार्ग दिखाया है। आज भारत अध्यात्म और दर्शन के साथ विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में भी निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्यभट्ट ने सदियों पहले पृथ्वी के गोल होने और खगोलीय ज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किए थे। भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना के साथ उसके माध्यम से लोककल्याण करना है।
अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन में अंत्योदय का भाव निहित है। तकनीक और शिक्षा तभी सार्थक हैं, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। नवभारत की तकनीक गांव के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य, शिक्षा और विभिन्न सेवाएं सहजता से पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी अपने ज्ञान को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाजोपयोगी बनाने का प्रयास करें। शिक्षा जब संवेदना से जुड़ेगी, तभी वह समाज और राष्ट्र के वास्तविक विकास का माध्यम बनेगी। इसके पूर्व मुख्य अतिथि और कुलपति को अभिनंदन पत्र एवं अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।---------------------
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव