शोध में विश्लेषणात्मक, कठोरता और साक्ष्य-आधारित पद्धति जरूरी : प्रो. सुधांशु पाण्डिया

 


कानपुर, 23 फरवरी (हि.स.)। समकालीन अकादमिक परिदृश्य में विश्लेषणात्मक कठोरता और साक्ष्य-आधारित शोध पद्धतियों का विशेष महत्व है। शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शिक्षकों और शोधार्थियों को आधुनिक उपकरणों व पद्धतियों से लैस होना चाहिए। यह बातें सोमवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ बिज़नेस मैनेजमेंट के निदेशक प्रो. सुधांशु पाण्डिया ने कही।

एसबीएम, छत्रपति शाहू जी महाराज (सीएसजेएमयू) द्वारा “सिस्टेमैटिक लिटरेचर रिव्यू एवं बिब्लियोमेट्रिक एनालिसिस” विषय पर एक सप्ताह का फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) ऑनलाइन माध्यम से शुरू किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और शोधार्थियों की शोध क्षमताओं को सुदृढ़ करना है। इसके अंतर्गत प्रतिभागियों को व्यवस्थित साहित्य समीक्षा की पद्धतियों, बिब्लियोमेट्रिक विश्लेषण तथा शोध डेटा विज़ुअलाइजेशन का संरचित व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

यह पहल कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की उस शैक्षणिक दृष्टि के अनुरूप है, जिसमें शोध उत्कृष्टता, नवाचार और विश्वविद्यालय की वैश्विक अकादमिक प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया है।

एफडीपी के संयोजक डॉ. प्रभात के. द्विवेदी, एसोसिएट प्रोफेसर, ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसकी व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के रिसोर्स पर्सन डॉ. सौरभ अग्रवाल, मशीन लर्निंग एवं डेटा एनालिटिक्स विशेषज्ञ, आगामी सत्रों में प्रतिभागियों को चरणबद्ध व्यावहारिक प्रदर्शन व संवादात्मक सत्रों के माध्यम से मार्गदर्शन देंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप