अमेठी में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही: दाहिनी आंख के स्थान पर प्रमाण पत्र में बाईं आंख को बताया दिव्यांग

 




अमेठी, 13 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। पिंडोरिया गांव निवासी रामऔतार की दाहिनी आंख से दिखाई नहीं देता, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी दिव्यांग प्रमाण पत्र में उनकी बाईं आंख को खराब दर्शाया गया है। 11 अप्रैल 2023 को ऑनलाइन जारी इस प्रमाण पत्र में दिव्यांगता का प्रतिशत भी महज 30 फीसदी दर्ज है, जिसके चलते रामऔतार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।

गौरतलब है कि गरीब और अशिक्षित रामऔतार ने प्रमाण पत्र मिलने के बाद उसे सुरक्षित रख लिया था। उन्हें जानकारी नहीं थी कि दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर पेंशन, बस यात्रा में रियायत समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त किया जा सकता है। करीब तीन साल बाद जब किसी ने उन्हें इन सुविधाओं के बारे में बताया तो वह प्रमाण पत्र लेकर ब्लॉक कार्यालय पहुंचे। वहां प्रमाण पत्र में आंख का विवरण गलत होने और दिव्यांगता 30 प्रतिशत दर्ज होने की जानकारी मिली।.आरोप है कि ब्लॉक कार्यालय में अधिकारियों ने प्रमाण पत्र को गलत बताते हुए रामऔतार को फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप में कार्रवाई और जेल जाने तक की आशंका जताई। इससे घबराए रामऔतार निराश होकर घर लौट आए। नियमानुसार, कई दिव्यांगजन लाभों के लिए 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता का प्रमाण पत्र आवश्यक होता है।

इस मामले में जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को बुलाकर जानकारी ली। सीएमओ ने स्पष्ट किया कि प्रमाण पत्र फर्जी नहीं है, बल्कि उनके कार्यालय से ही जारी किया गया है। उनके मुताबिक, प्रमाण पत्र बनाते समय सर्वर संबंधी त्रुटि के कारण दाहिनी आंख की जगह बाईं आंख दर्ज हो गई। उन्होंने रामऔतार को बुलाकर प्रमाण पत्र में सुधार कराने का आश्वासन दिया।

अब सवाल यह है कि ऑनलाइन जारी प्रमाण पत्र में हुई इस त्रुटि को ठीक कराकर रामऔतार को नियमानुसार दिव्यांगता का सही आंकलन और सरकारी योजनाओं का लाभ कब तक मिल पाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश त्रिपाठी