एआई पत्रकारिता का विकल्प नहीं, क्षमता बढ़ाने वाला तकनीकी उपकरण : डॉ. संदेश गुप्ता

 


कानपुर, 07 अगस्त (हि.स.)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को पत्रकारिता के विकल्प के बजाय पत्रकारों की क्षमता बढ़ाने वाले तकनीकी उपकरण के रूप में समझना चाहिए। एआई टूल्स का इस्तेमाल करते समय तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय विवेक, तथ्यपरकता और नैतिकता को प्राथमिकता देना जरूरी है। यह बातें शुक्रवार को कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष डॉ. संदेश गुप्ता ने सीएसजेएमयू के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कहीं।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में एसेंशियल एआई टूल्स ऑन मीडिया (ए प्रैक्टिकल गाइड) विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को मीडिया के बदलते स्वरूप के अनुरूप एआई आधारित तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है।

डॉ. संदेश गुप्ता ने कहा कि एआई अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, पत्रकारिता, मीडिया और रचनात्मक उद्योगों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में वही मीडिया प्रोफेशनल अधिक प्रभावी होंगे, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के साथ नई तकनीक को समझकर उसका रचनात्मक इस्तेमाल करेंगे।

कार्यशाला के पहले दिन कंटेंट राइटिंग एवं रिसर्च, रिपोर्टिंग, इमेज एवं डिजाइन तथा वीडियो एवं ऑडियो निर्माण में एआई के उपयोग पर सत्र हुए। डॉ. होइमावती तालुकदार ने लेखन, अकादमिक शोध, सूचना के संगठन और शोध प्रक्रिया में एआई टूल्स के इस्तेमाल की जानकारी दी। उन्होंने सही प्रॉम्प्ट और उपयुक्त एआई टूल के जरिए लेखन एवं शोध को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के तरीके बताए।

हुमा आलम ने समाचार संकलन, सूचना विश्लेषण, स्टोरी आइडिया और न्यूजरूम कार्यप्रणाली में एआई की उपयोगिता समझाई। प्रियंका ने एआई के माध्यम से इमेज निर्माण, रचनात्मक डिजाइन और दृश्य प्रस्तुति का प्रशिक्षण दिया। स्वाति कनौजिया ने वीडियो और ऑडियो निर्माण में एआई आधारित तकनीकों के उपयोग की जानकारी दी।

विद्यार्थियों ने विभिन्न एआई टूल्स पर प्रत्यक्ष अभ्यास भी किया। उन्हें वास्तविक मीडिया कार्यों के माध्यम से तकनीक के इस्तेमाल, समय की बचत और बेहतर कंटेंट निर्माण की प्रक्रिया समझाई गई।

विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि एआई की जानकारी पत्रकारिता विद्यार्थियों के लिए आवश्यक व्यावसायिक दक्षता बनती जा रही है। विद्यार्थियों को तकनीक के साथ पत्रकारिता के मूल्यों, तथ्यपरकता और मीडिया नैतिकता का भी ध्यान रखना चाहिए।

कार्यशाला में डॉ. ओमशंकर गुप्ता, डॉ. जितेन्द्र डबराल, डॉ. योगेन्द्र पाण्डेय, डॉ. रश्मि गौतम, डॉ. हरिओम कुमार, सागर कनौजिया, प्रेम किशोर शुक्ला सहित संकाय सदस्य और विद्यार्थी मौजूद रहे। शनिवार को कार्यशाला के दूसरे दिन सोशल मीडिया एवं कंटेंट रणनीति, उत्पादकता, नैतिकता, तथ्य-जांच और मीडिया के भविष्य में एआई की भूमिका पर सत्र होंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप