एआई को जिम्मेदारी से अपनाकर शिक्षा और समाज के विकास में करें उपयोग : प्रो. मणींद्र अग्रवाल

 


कानपुर, 12 सितंबर (हि.स.)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए शिक्षा, शोध, स्वास्थ्य, कृषि, शासन और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव की संभावनाएं हैं, लेकिन इसके जिम्मेदार और मानव हित में उपयोग पर भी ध्यान देना होगा। यह बातें शनिवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने सीएसजेएमयू में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में शुरू हुए दो दिवसीय एआई मंथन 2.0 के उद्घाटन सत्र में कही।

कार्यक्रम में प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, वित्त अधिकारी और तकनीकी टीमों समेत 500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने एआई के विकास, भविष्य की संभावनाओं, शोध, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और उत्तर प्रदेश को एआई सक्षम बनाने के रोडमैप पर चर्चा की।

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति और एआई के क्षेत्र में किए गए नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों ने 75 हजार से अधिक आंगनबाड़ियों को गोद लेने के साथ चार लाख से अधिक टीबी मरीजों की देखभाल और एचपीवी टीकाकरण अभियान में योगदान दिया है। उन्होंने डिजिटल गवर्नेंस और समर्थ पोर्टल से हुए बदलावों की भी जानकारी दी।

कुलाधिपति के निजी सचिव डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने बताया कि एआई मंथन 2.0 का उद्देश्य एआई को उच्च शिक्षा की व्यवस्थाओं से जोड़कर इसके व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 56 लाख सक्रिय विद्यार्थी समर्थ रजिस्ट्री से जुड़े हैं तथा 39 राज्य विश्वविद्यालयों और 96 से अधिक महाविद्यालयों को इससे जोड़ा जा चुका है।

प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने एआई के इतिहास, विकास और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कंप्यूटिंग पावर, न्यूरल नेटवर्क, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के विकास के साथ एआई तेजी से आगे बढ़ा है। एआई जटिल वैज्ञानिक और गणितीय समस्याओं के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

आईआईटी खड़गपुर के प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती ने एआई के जरिए ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों को एकीकृत करने की संभावनाओं पर चर्चा की। प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार ने यूपी एआई मिशन और प्रदेश के एआई रोडमैप की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिशन के तहत अगले पांच वर्षों में 2,000 करोड़ रुपये के फंड की घोषणा की गई है।

फिलिप्स इंडिया एवं ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के डॉ. दिनेश एमएस ने स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के उपयोग पर चर्चा करते हुए कहा कि यह मेडिकल इमेजिंग, कैंसर की शुरुआती पहचान और क्लिनिकल निर्णय में चिकित्सकों की मदद कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई डॉक्टर का विकल्प नहीं बल्कि निर्णय लेने में सहायक तकनीक है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप