छात्रों में नवाचार और जागरूकता बढ़ा रहीं एआई प्रतियोगिताएं : डॉ. सीमा सोनकर

 


कानपुर, 08 अप्रैल (हि.स.)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आज के दौर में शिक्षा और नवाचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है और छात्रों को इसके प्रति जागरूक करना समय की जरूरत है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता और विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर मिलता है। एआई के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को समझना भी आवश्यक है, ताकि इसका सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। विश्वविद्यालय स्तर पर इस तरह की प्रतियोगिताएं छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक साबित हो रही हैं। “एआई आधारित प्रतियोगिताएं छात्रों में नवाचार, जागरूकता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं। यह बातें बुधवार को अधिष्ठाता डॉ. सीमा सोनकर ने कही।

चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा एवं संचार प्रबंधन विभाग में एआई संबंधी प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करना था।

कार्यक्रम के दौरान वाद-विवाद, रंगोली एवं डिजिटल पोस्टर प्रस्तुतीकरण प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वाद-विवाद प्रतियोगिता “एआई: वरदान या अभिशाप” विषय पर आयोजित हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. संघमित्रा महापात्रा ने किया। इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. सीमा सोनकर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता सिंह का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। साथ ही निर्णायक मंडल के सदस्य डॉ. एकता शर्मा एवं डॉ. संगीता गुप्ता का भी सम्मान किया गया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. जया वर्मा एवं डॉ. ऐश्वर्या सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी देखरेख में कार्यक्रम सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुआ।

अंत में अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए छात्र-छात्राओं के प्रयासों की प्रशंसा की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप