लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी की 'चिंतन चौपाल'
लखनऊ, 06 अक्टूबर (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) लखनऊ विश्वविद्यालय इकाई द्वारा मंगलवार काे आयोजित “चिंतन चौपाल” के छठे संवाद का सफल आयोजन किया गया। इस बार संवाद का मुख्य विषय “वैचारिक कार्यप्रणाली एवं सामाजिक क्षति” रहा, जिसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस वैचारिक गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में राजनीति विज्ञान संकाय के सहायक आचार्य डॉ. जितेन्द्र शुक्ला मौजूद रहे। उन्होंने छात्रों व शोधार्थियों के साथ विचारधारा, वैचारिक कार्यप्रणाली और समाज पर पड़ने वाले उसके विभिन्न प्रभावों पर गहराई से चर्चा की।
'दिमागी नक्सलवाद' और सामाजिक प्रभाव पर विमर्श
संवाद के दौरान समाज में पनप रहे “दिमागी नक्सलवाद” की अवधारणा, उसके वैचारिक आधार और काम करने के तरीकों पर विस्तार से विमर्श किया गया। चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि किस प्रकार विचारों के प्रसार की कुछ प्रक्रियाएँ समाज और सार्वजनिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
डॉ. शुक्ला और उपस्थित छात्रों ने इस बात को रेखांकित किया कि उग्र वैचारिक ध्रुवीकरण, संस्थागत अविश्वास और सामाजिक तनाव किस तरह बड़े पैमाने पर समाज में असहमति, आपसी संघर्ष और अव्यवस्था को जन्म दे सकते हैं।
इस बौद्धिक विमर्श को समृद्ध बनाने में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से आए शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने विषय से जुड़े कई तीखे व तार्किक प्रश्न पूछे और अपने दृष्टिकोण साझा किए, जिससे यह संवाद बेहद जीवंत और ज्ञानवर्धक रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन