समायोजन में दिव्यांग व गंभीर रोगी शिक्षकों को मिले राहत, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने अपर मुख्य सचिव को भेजा पत्र
- 31 मार्च 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों को भी छूट देने की उठाई मांग
लखनऊ, 17 जुलाई (हि.स.)। बेसिक शिक्षा परिषद में चल रही शिक्षक समायोजन प्रक्रिया के बीच राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्राथमिक संवर्ग) ने शासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग उठाई है। संगठन ने दिव्यांग, गंभीर रोग से पीड़ित, 31 मार्च 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों तथा प्रधानाध्यापकों को समायोजन से राहत देने के लिए अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा को पत्र भेजा है। संगठन का कहना है कि ऐसे शिक्षकों को समायोजन के दायरे में लाने से अनावश्यक मानसिक, शारीरिक और प्रशासनिक परेशानियां बढ़ेंगी।
संगठन ने पत्र में कहा है कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रदेशभर में शिक्षक समायोजन की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन स्पष्ट और एकरूप दिशा-निर्देशों के अभाव में विभिन्न जिलों की सरप्लस सूची में काफी असमानताएं और त्रुटियां सामने आ रही हैं। कई जिलों में दिव्यांग, गंभीर बीमार, जल्द सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक और प्रधानाध्यापक भी सरप्लस घोषित कर दिए गए हैं।
प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कहा कि पूर्व के समायोजन अभियानों में ऐसे शिक्षकों को मानवीय आधार पर छूट दी जाती रही है। वर्तमान प्रक्रिया में भी उसी व्यवस्था को लागू किया जाना चाहिए, ताकि विशेष परिस्थितियों से गुजर रहे शिक्षकों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने कहा कि शासन को तत्काल स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए, जिससे पूरे प्रदेश में समायोजन की एक समान और न्यायसंगत व्यवस्था लागू हो सके तथा किसी भी जिले में अलग-अलग मानक न अपनाए जाएं। प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने उम्मीद जताई कि शासन शिक्षकों के हित और मानवीय पक्ष को प्राथमिकता देते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश