पति को पतन से बचाकर सही राह दिखाए, वही धर्मपत्नी : आचार्य शांतनु महाराज
जौनपुर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जौनपुर में बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में आयोजित नौ दिवसीय श्रीरामकथा के छठवें दिन सोमवार को कथाव्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने अयोध्याकांड, श्रीराम वनगमन, केवट संवाद और उर्मिला के त्याग का भावपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान मुख्य आयोजक ज्ञान प्रकाश सिंह ने निषाद समाज के लालजी निषाद को मंच पर सम्मानित किया।
आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि सत्संग व्यक्ति को सही दिशा देता है, जबकि कुसंग पतन का कारण बनता है। मंथरा और कैकेयी के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने कुसंग के दुष्प्रभावों को समझाया। माता कौशल्या के त्याग और संस्कारों का उल्लेख करते हुए कहा कि मां का अपने पुत्र पर पिता से दस गुना अधिक अधिकार माना गया है।
लक्ष्मण और उर्मिला के प्रसंग में उन्होंने कहा कि जो पत्नी अपने पति को पतन से बचाकर सही मार्ग पर चलने में सहयोग करे, वही सच्ची धर्मपत्नी है। उर्मिला ने लक्ष्मण के वनगमन को अपना सौभाग्य मानते हुए 14 वर्षों तक त्यागपूर्ण जीवन बिताया।
श्रीराम और केवट संवाद का वर्णन सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। केवट ने प्रभु के चरण पखारकर उन्हें गंगा पार उतारा और बदले में भवसागर से पार लगाने की प्रार्थना की। महाराज ने कहा कि केवट की निष्काम भक्ति और समर्पण सदैव प्रेरणादायी रहेंगे।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल, विधायक सुशील सिंह, डॉ. अवधेश सिंह, पूर्व विधायक डॉ. हरेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री जगदीश सोनकर, पूर्व विधायक सुषमा पटेल, भाजपा नेता वेद प्रकाश सिंह, रमेश जी, आदित्य जी, राजेंद्र जी, संत-महात्माओं सहित सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव