पंडित नेहरू अपने दौर के नेताओं से अलग सोच रखने वाले व्यक्तित्व थे : प्रो. दीपक मलिक

 




देवरिया, 27 मई (हि.स.) । गांधी जन मंच एवं नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया के संयुक्त तत्वावधान में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर बुधवार काे “वैश्विक चुनौतियां एवं नेहरू” विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने नेहरू के विचारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और आधुनिक भारत निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्य वक्ता प्रो. दीपक मलिक, पूर्व निदेशक गांधी अध्ययन केंद्र वाराणसी ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू अपने दौर के नेताओं से अलग सोच रखने वाले व्यक्तित्व थे। वे ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते थे, जहां विज्ञान, संस्कृति और परंपरा का समन्वय हो तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ समाज आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि नेहरू वैज्ञानिक समाजवाद के समर्थक थे और अपने समय की चुनौतियों का डटकर सामना करते हुए भारत को विश्व की महाशक्तियों के समकक्ष खड़ा किया।

उन्होंने वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूंजीवादी नियंत्रण के कारण यह व्यवस्था भविष्य में आम आदमी को निष्क्रिय बना सकती है।

विशिष्ट वक्ता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. आनंद दीपायन ने कहा कि नेहरू का पूरा जीवन वैश्विक चुनौतियों के बीच बीता। वे समझ चुके थे कि भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने के लिए गरीबों और आम जनता के साथ खड़ा होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नेहरू लोकतंत्र के सबसे बड़े समर्थकों में थे और उनका मानना था कि लोकतंत्र के बिना देश एवं समाज का विकास संभव नहीं है।

गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे इन्द्र कुमार दीक्षित ने कहा कि नेहरू केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संपूर्ण विचार और समाज थे। उन्होंने विश्व के विभिन्न देशों से तकनीक और सामाजिक मूल्यों को आत्मसात कर आधुनिक भारत के निर्माण की मजबूत नींव रखी।

सभा के मंत्री डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस सभागार में नेहरू की पुण्यतिथि मनाया जाना गर्व का विषय है। कार्यक्रम संयोजक ऋषिकेश मिश्र ने कहा कि आज विश्व बारूद के ढेर पर खड़ा है, लेकिन नेहरू जैसा साहसिक नेतृत्व आज दुर्लभ दिखाई देता है।

कार्यक्रम का संचालन सरोज कुमार पाण्डेय ने किया। इससे पूर्व अतिथियों ने पंडित नेहरू एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की। सरस्वती वंदना दयाशंकर कुशवाहा ने प्रस्तुत की। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षाविद, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक