गोरखपुर में देशभर के सर्जनों का महासंगम, डॉ. शिव शंकर शाही की पहल पर दिखेगी शहर की गौरवशाली विरासत
गोरखपुर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक उपलब्धियों और शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों का साक्षी बनने के साथ गोरखपुर अपनी गौरवशाली विरासत, समृद्ध संस्कृति और औद्योगिक प्रगति से देशभर के चिकित्सकों को परिचित कराने की तैयारी में है। आगामी 26 से 29 नवंबर तक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर में आयोजित होने वाला यूपीएसीकॉन-2026 चिकित्सा विशेषज्ञों के व्यापक समागम के साथ पूर्वांचल की सांस्कृतिक और उद्यमशील पहचान को राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा।
सम्मेलन के आयोजन सचिव एवं शाही ग्लोबल हॉस्पिटल, तारामंडल के निदेशक डॉ. शिव शंकर शाही ने इस आयोजन को चिकित्सा जगत की उपलब्धियों के साथ गोरखपुर की सांस्कृतिक चेतना और स्थानीय प्रतिभाओं से जोड़ने की विशेष पहल की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले चिकित्सकों के समक्ष गोरखपुर की ऐसी बहुआयामी तस्वीर प्रस्तुत की जानी चाहिए, जिसमें इसकी आध्यात्मिक विरासत, साहित्यिक परंपरा, कलात्मक समृद्धि, औद्योगिक संभावनाएँ और आधुनिक विकास यात्रा एक साथ दिखाई दें।
डॉ. शाही ने कहा कि गोरखपुर की पहचान केवल एक ऐतिहासिक और धार्मिक नगर तक सीमित नहीं है। यह भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक चेतना, विशिष्ट शिल्पकला और उभरती उद्यमिता का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के चिकित्सा सम्मेलन को स्थानीय कला, संस्कृति और व्यापारिक गतिविधियों से जोड़ना शहर की विशिष्टताओं को व्यापक पहचान दिलाने का सार्थक अवसर है।
उन्होंने गोरखपुर के व्यापारियों, उद्यमियों, हस्तशिल्पियों, कलाकारों, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से सम्मेलन में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है। डॉ. शाही के अनुसार, एम्स परिसर में स्थानीय उत्पादों और उपलब्धियों के प्रदर्शन के लिए स्टॉल एवं प्रदर्शनी स्थल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि देशभर से आने वाले चिकित्सा विशेषज्ञ गोरखपुर की विविध विशेषताओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित हो सकें।
प्रस्तावित प्रदर्शनी में गोरखपुर की प्रसिद्ध टेराकोटा कला, पारंपरिक हथकरघा, हस्तशिल्प, स्थानीय उद्योगों के उत्पाद, विशिष्ट व्यंजन और पारंपरिक मिठाइयों को स्थान दिया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त गोरखनाथ मंदिर की आध्यात्मिक विरासत, गीता प्रेस की साहित्यिक-सांस्कृतिक परंपरा तथा महानगर की आधुनिक विकास यात्रा को भी प्रमुखता से प्रस्तुत करने की योजना है।
डॉ. शिव शंकर शाही ने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय आयोजन की सफलता केवल उसमें होने वाले अकादमिक विमर्श या प्रतिभागियों की संख्या से नहीं आँकी जानी चाहिए, बल्कि इस बात से भी निर्धारित होती है कि आगंतुक अपने साथ उस शहर की कैसी स्मृतियाँ और अनुभूतियाँ लेकर लौटते हैं। उनका प्रयास है कि गोरखपुर आने वाले चिकित्सक यहाँ की चिकित्सा सुविधाओं और शैक्षणिक वातावरण के साथ इसकी सांस्कृतिक समृद्धि, आत्मीय आतिथ्य और स्थानीय प्रतिभाओं की विशिष्टता से भी प्रभावित हों।
सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष एवं एम्स गोरखपुर के शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने भी इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए स्थानीय संस्थाओं और उद्यमियों की सहभागिता को आयोजन की व्यापक सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताया। आयोजकों के अनुसार, चार दिवसीय सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों शल्य चिकित्सकों और चिकित्सा विशेषज्ञों के शामिल होने की संभावना है।
डॉ. शाही ने कहा कि यूपीएसीकॉन-2026 को चिकित्सा विशेषज्ञता और गोरखपुर की सांस्कृतिक अस्मिता के संगम के रूप में विकसित करना उनका उद्देश्य है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि इस अवसर को केवल चिकित्सा संस्थानों तक सीमित न रहने दें, बल्कि सामूहिक सहभागिता से इसे पूरे गोरखपुर के गौरव और आतिथ्य का उत्सव बनाएँ।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देशभर से आने वाले चिकित्सक यहाँ से केवल चिकित्सा विज्ञान की नवीन जानकारियाँ लेकर नहीं लौटेंगे, बल्कि गोरखपुर की संस्कृति की सुगंध, शिल्प की उत्कृष्टता, आतिथ्य की आत्मीयता और विकास की प्रेरक छवि भी अपने साथ लेकर जाएँगे।
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय