आईआईटी कानपुर के 59वें दीक्षांत समारोह में 3,104 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां : डॉ. पवन गोयनका

 


कानपुर, 15 जुलाई (हि.स.)। आईआईटी कानपुर के 59वें दीक्षांत समारोह में इस वर्ष 3,104 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। यह उपलब्धि केवल शैक्षणिक सफलता नहीं, बल्कि देश के भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह बातें बुधवार को आईआईटी कानपुर के 59वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. पवन गोयनका ने कहीं।

आईआईटी कानपुर का 59वां दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ, जिसमें स्नातक, स्नातकोत्तर और ई-मास्टर्स कार्यक्रमों के कुल 3,104 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 1,247 स्नातक, 1,325 स्नातकोत्तर तथा 532 ई-मास्टर्स कार्यक्रम के विद्यार्थी शामिल रहे। समारोह की अध्यक्षता आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के कार्यवाहक अध्यक्ष जयंत पाटिल ने की। मुख्य अतिथि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के अध्यक्ष एवं पद्मश्री से सम्मानित डॉ. पवन गोयनका रहे, जबकि संस्थान के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल भी मौजूद रहे।

दीक्षांत समारोह दो सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र में मुख्य सभागार में राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक सहित विभिन्न पदक और पुरस्कार प्रदान किए गए, जबकि दूसरे सत्र में विभिन्न व्याख्यान कक्षों में विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से उपाधियां सौंपी गईं।

मुख्य अतिथि डॉ. पवन गोयनका ने कहा कि जीवन एक लंबी यात्रा है, जिसमें असफलताओं से सीखते हुए आगे बढ़ना पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कभी हार न मानने, बड़े सपने देखने, लोगों पर भरोसा रखने, निरंतर सीखते रहने और विकसित भारत के निर्माण में अपनी प्रतिभा एवं ज्ञान का योगदान देने का आह्वान किया।

आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के कार्यवाहक अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा कि डिग्री केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदारी, नवाचार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की अपील की।

संस्थान के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि आज के तकनीकी युग में केवल जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। सही प्रश्न पूछने, नैतिक निर्णय लेने, विभिन्न विषयों के बीच संबंध स्थापित करने और मानवीय मूल्यों को बनाए रखने की क्षमता ही वास्तविक बुद्धिमत्ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवनभर सीखते रहने और समय के साथ स्वयं को लगातार विकसित करने का आह्वान किया।

इस वर्ष 390 पीएचडी, 53 एमटेक-पीएचडी संयुक्त डिग्री, 502 एमटेक, 852 बीटेक, 212 बीएस, 186 एमएससी, 59 एमबीए, 36 एमडिजाइन, 66 एमएस (रिसर्च), 107 ड्यूल डिग्री समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। राष्ट्रपति स्वर्ण पदक कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के सागर के. वी. को प्रदान किया गया। निदेशक स्वर्ण पदक स्टैटिस्टिक्स एंड डेटा साइंस के आदित्य वी. तथा एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के ऋत्विक शंकर को मिला। ध्रुव बुधेदेव को रतन स्वरूप स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के मेधावी विद्यार्थियों को अन्य संस्थागत पदक और अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

समारोह के अंत में पारंपरिक दीक्षांत परिधान में शामिल विद्यार्थियों ने अपनी उपाधियां प्राप्त कर जीवन की नई पारी की शुरुआत की और ज्ञान, नवाचार, नेतृत्व तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ देश के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप