वंदे मातरम के 150वें वर्ष पर बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में सजी पुनर्नवा सांस्कृतिक संध्या
कानपुर, 17 अक्टूबर (हि.स.)। ‘वंदे मातरम’ के 150वें स्वर्णिम वर्ष के अवसर पर बेनाझाबर स्थित बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज के विशाल प्रांगण में शनिवार शाम ‘पुनर्नवा-सांस्कृतिक संध्या’ का भव्य आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति की झलक पेश की। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कानपुर प्रांत के प्रांत प्रचारक श्रीराम ने कहा कि परिवार बच्चों की पहली पाठशाला और संस्कारशाला है। सत्य, करुणा, अनुशासन और आदर जैसे मानवीय मूल्यों का बीजारोपण परिवार में ही होता है। संस्कारयुक्त परिवार से ही सशक्त समाज और स्वाभिमानी राष्ट्र का निर्माण संभव है।
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीराम के आगमन के साथ हुआ। विद्यालय के मुख्य द्वार पर वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और एनसीसी के विद्यार्थियों की ओर से दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उनका स्वागत किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि ने विद्यालय परिसर में स्थापित बैरिस्टर नरेंद्रजीत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। दीप प्रज्वलन और मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई। विद्यार्थियों ने ‘राधा रमणम् हरे-हरे’ भजन और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की सुमधुर प्रस्तुति दी। विद्यालय की उप प्रधानाचार्या मंजूबाला श्रीवास्तव ने अतिथियों, प्रबंध समिति के सदस्यों, अभिभावकों और उपस्थित लोगों का स्वागत किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत नन्हे विद्यार्थियों के बालगीत ‘दादी अम्मा मान जाओ’ और ‘रिश्तों का अनमोल संसार’ नृत्य से हुई। इनके माध्यम से पारिवारिक मूल्यों और संयुक्त परिवार के महत्व को दर्शाया गया। इसके बाद देवी गीत, गरबा नृत्य, भोजपुरी लोकगीत ‘माथे पे पगड़िया’, ‘मेरा भारत मेरी पहचान’ और ‘भारत उत्सव’ जैसी प्रस्तुतियों ने भारतीय लोक संस्कृति और विविधता में एकता का संदेश दिया। ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्ष को समर्पित विशेष नृत्य नाटिका ‘वंदेमातरम-राष्ट्रभक्ति की अमर गाथा’ ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। प्रस्तुति के दौरान परिसर भारत माता की जय और वंदे मातरम के जयकारों से गूंज उठा। सामूहिक गीतों ने भी दर्शकों में राष्ट्रप्रेम की भावना का संचार किया।
अध्यक्षीय संबोधन में विद्यालय के संरक्षक एवं ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामंडल के अध्यक्ष वीरेंद्रजीत पराक्रम आदित्य ने विद्यार्थियों के अनुशासित और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। मुख्य अतिथि श्रीराम ने बैरिस्टर नरेंद्रजीत सिंह के जीवन मूल्यों और समाज के पुनर्निर्माण में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कुटुंब प्रबोधन पर जोर देते हुए कहा कि विद्यालय बच्चों को बौद्धिक ज्ञान देता है, जबकि परिवार उनके चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करता है। उन्होंने अभिभावकों से व्यस्त दिनचर्या के बीच परिवार के साथ समय बिताने और बच्चों से आत्मीय संवाद बनाए रखने का आह्वान किया, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जुड़ी रहे।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में विद्यालय के उपाध्यक्ष बालकृष्ण लाहोटी ने अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रबंधक आदित्य शंकर बाजपेयी, प्रांत संघचालक एवं सह-प्रबंधक भवानी भीख तिवारी, कमल किशोर गुप्ता, शरद कृष्ण पांडे, नंदिता वीरेंद्रजीत सिंह, नीतू सिंह, वेणुरंजन भदौरिया और प्रधानाचार्य बृजमोहन कुमार सिंह सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, नगर के विद्यालयों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य, अभिभावक, शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप